शिमला, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में गत चार सालों में जन वितरण प्रणाली के तहत 14.48 करोड़ रुपये मूल्य की खराब और कीड़े लगी दालों की जनता को आपूर्ति की गई है। यह बात देश के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने कही।
सीएजी ने कहा कि ऐसी दालों के 11 आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित तरजीह भी दिया गया, जबकि गुणवत्ता परीक्षण में उनके दाल पास नहीं कर पाए थे।
2010-14 के बीच 22,296 कुंटल दाल, 2,50,213 लीटर सरसों और रिफाइंड तेल और 12,568 कुंटल आयोडीनयुक्त नमक के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में खरे नहीं उतरे। इनका कुल मूल्य 14.48 करोड़ रुपये है।
सीएजी ने कहा कि इसमें 1.77 करोड़ रुपये मूल्य के 3,309 कुंटल कीड़े लगी दालों की आपूर्ति भी शामिल है।
सीएजी ने कहा है कि नमूनों की परीक्षण रपट तीन से चार महीने की देरी से मिली थी, जिसके कारण उपभोक्ताओं को जन वितरण प्रणाली के जरिए खराब सामग्रियों की आपूर्ति हो गई।
हिमाचल प्रदेश के पास अपनी खाद्य सब्सिडी योजना है, जिसके तहत 16,99,255 राशनकार्ड धारकों को तीन तरह के दाल, खाद्य तेल और नमक सब्सिडी दर पर दिए जाते हैं।
मौजूदा कारोबारी साल में सरकार ने खाद्य सब्सिडी योजना के लिए 210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
सीएजी ने कहा कि 2010 से 2014 के बीच 11 आपूर्तिकर्ताओं ने 5.59 करोड़ रुपये मूल्य की 11,198 कुंटल दाल की आपूर्ति की थी। इन आपूर्तिकर्ताओं को बार-बार आपूर्ति के लिए ठेके दिए गए, जबकि पिछली जांच में उनकी आपूर्ति के नमूने गुणवत्ता मानक पर खरे नहीं उतरे थे।
सीएजी ने कहा कि सरकार के पास खराब आपूर्ति करने वालों की पहचान करने और उनको काली सूची में डालने की कोई व्यवस्था नहीं है।
सीएजी को दिए गए जवाब में सरकार ने कहा कि खराब खाद्य वस्तुओं को बदलने में असमर्थ होने की स्थिति में ऐसे आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति मूल्य का 20 फीसदी जुर्माने के तौर पर वसूला गया है।
काली सूची में डालने के मुद्दे पर सरकार ने कहा कि यह एक सही विकल्प नहीं है, क्योंकि भविष्य में इससे निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा घटेगी।
सीएजी ने कहा कि सरकार के उत्तर से 20 फीसदी जुर्माना भुगतान के साथ खराब आपूर्ति को बार-बार स्वीकार करने को सही ठहराया गया।
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