हिमाचल : 50000 महिलाएं आजीविका मिशन से लाभान्वित

शिमला, 4 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत 9,146 स्वयं सहायता समूहों के जरिए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की लगभग 50,000 महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। एक अधिकारी ने यहां सोमवार को यह जानकारी दी।

सरकारी प्रवक्ता ने आईएएनएस को बताया, “अभी तक 6,345 स्वयं सहायता समूह इससे जुड़ चुके हैं। बैंक उन्हें 148 करोड़ रुपये के लक्ष्य के साथ 59.09 करोड़ रुपये का कर्ज दे रहे हैं।”

प्रवक्ता ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के बीच 2.97 करोड़ रुपये का चक्रीय धन वितरित किया जा चुका है।

राज्य में अप्रैल 2013 से संचालित एनआरएलएम का लक्ष्य सभी गरीब परिवारों को गरीबी से उबरने में मदद करना है।

प्रवक्ता ने बताया, “मिशन लागू होने के पहले चरण में सघन ब्लॉकों के तौर पर पांच ब्लॉक- कंदाघाट, मंडी सदर, नुरपुर, हरोली और बसंतपुर- का चुनाव हुआ था। बचे ब्लॉकों को अगले चार सालों में चरणबद्ध तरीके से इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा।”

मौजूदा वित्त वर्ष में राज्य सरकार का मुख्य ध्यान सामाजिक लामबंदी, संस्था निर्माण और मानव संसाधनों के सृजन पर है।

कार्यक्रम की शुरुआत से केंद्र सरकार 1,492.11 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर चुकी। राज्य का योगदान 333 लाख रुपये है।

बाद में गरीब और गरीबी रेखा से मामूली रूप से ऊपर उठ चुके परिवारों को एनआरएलएम के अंतर्गत लाया जाएगा।

सभी स्वयं सहायता समूह सूक्ष्म वित्तपोषण के लिए बैंकों से जुड़े हैं। योजना के तहत एक बैंक हर स्वयं सहायता समूह को अपना उद्यम शुरू करने के लिए सात फीसदी ब्याज पर 20,000 रुपये से 3,00,000 रुपये तक ऋण उपलब्ध कराएगा, जो कि प्रदर्शन के आधार पर 10 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

इन स्वयं सहायता समूहों द्वारा नियमित कर्ज अदायगी पर प्रभावी ब्याज दर कम करके चार फीसदी कर दी जाएगी। बाकी ब्याज अनुदान केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा।

स्वयं सहायता समूहों द्वारा सहज प्रक्रिया, बैंक संपर्को और ब्याज आर्थिक सहायता वितरण सुनिश्चित करने के लिए राज्यस्तरीय बैंकरों की एक समिति गठित की गई है।

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