टोक्यो, 23 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए जापान दौरे के दौरान वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा शहर पर हुए परमाणु बम हमले के लिए माफी नहीं मांगेंगे।
ओबामा ने रविवार को कहा कि हिरोशिमा दौरा जापान व अमेरिका के बीच दोस्ताना संबंधों पर जोर देने को लेकर होगा।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ शुक्रवार को हिरोशिमा का दौरा करने वाले ओबामा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति होंगे।
जापान के सरकारी प्रसारक, एनएचके को दिए एक साक्षात्कार में ओबामा ने कहा कि संघर्ष के दौरान नेताओं को कभी-कभी कड़े फैसले लेने पड़ते हैं और पश्चिमी जापानी शहर में राष्ट्रपति जो बयान जारी करेंगे उसमें माफी से संबंधित कोई बात नहीं होगी।
ओबामा ने कहा, “इस बात को समझना चाहिए कि युद्ध के दौरान नेता हर प्रकार के फैसले लेते हैं। सवाल और उनकी जांच करना इतिहासकारों का काम है।”
उन्होंने कहा, “लेकिन मैं इस बात को जानता हूं कि प्रत्येक नेता को खासकर युद्ध के दौरान गंभीर फैसले लेने पड़ते हैं।”
हिरोशिमा पर छह अगस्त, 1945 को परमाणु बम गिराया गया था, जिसमें तत्काल हजारों लोगों की मौत हो गई और युद्ध के खत्म होने तक 1.4 लाख लोगों की मौत हुई।
जापान के ही शहर नागासाकी पर नौ अगस्त को दूसरा परमाणु बम गिराया गया, जिसके छह दिनों बाद जापान को युद्ध में समर्पण करना पड़ा।
अधिकांश अमेरिकियों का मानना है कि युद्ध को खत्म करने तथा अमेरिकी और जापानी लोगों की जान बचाने के लिए परमाणु बम गिराना जरूरी था, जबकि कई इतिहासकार इस पर सवाल उठाते हैं।
बीते 20 मई को जारी एक सर्वेक्षण के मुताबिक, अमेरिका के अधिकांश लोगों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान परमाणु बम के इस्तेमाल को लेकर अमेरिका द्वारा किसी भी प्रकार की माफी का विरोध किया है।
साल 2009 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले ओबामा ने परमाणु अप्रसार पर अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि वाशिंगटन व टोक्यो के वर्तमान संबंधों पर जोर देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “चूंकि मेरे कार्यकाल के अब कुछ ही महीने बचे हैं, इसलिए मैं सोचता हूं कि यह मेरे लिए युद्ध पर अपने विचार दर्शाने का सही समय है। मैं यही सोचता हूं कि युद्ध होने पर निर्दोष लोग सर्वाधिक पीड़ित होते हैं।”
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