वाशिंगटन, 2 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी विदेश विभाग के एक पूर्व सूचना-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ ने अपनी गवाही से बचने के लिए अगले हफ्ते ‘फिफ्थ एमेंडमेंट’ का सहारा लेने की योजना बनाई है। यह विशेषज्ञ पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन का निजी ईमेल सर्वर लगाने और उसका रखरखाव करने में शामिल था। उसने इस बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया है।
‘फिफ्थ एमेंडमेंट’ अमेरिकी संविधान की ऐसी व्यवस्था है जिसमें कुछ अपवादों को छोड़कर किसी को उसकी इच्छा के खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
सीएनएन की खबर के अनुसार, कर्मचारी ब्रायन पैगलियानो ने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के साथ इसी साल पहले एक प्रतिरक्षा करार को स्वीकार कर लिया। उसके बाद उसने एफबीआई से सर्वर की जांच के संबंध में सहयोग करना शुरू कर दिया।
पैगलियानो को कंजरवेटिव पार्टी के निगरानी गुट ‘ज्यूडिशियल वाच’ ने विदेश विभाग के खिलाफ ‘फ्रीडम ऑफ इनफार्मेशन एक्ट’ के तहत मुकदमे में गवाही के लिए समन भेजा है। इस मामले में पेश होने वाले कम से कम सात गवाहों में पैगलियानो भी एक है जिससे यह समूह आने वाले हफ्तों में साक्षात्कार करने वाला है।
अदालत में बुधवार को दर्ज कराए गए आवेदन में पैगलियानो के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल अब एक ऐसे मुकदमे में फंसा है जो बगैर किसी संदेह के एक ‘राजनीतिक एजेंडा’ है। वकील ने कहा कि उसका बयान जो छह जून को दर्ज कराया जाना है, उसे अब नहीं रिकार्ड किया जाए।
उसके वकीलों ने कहा, पैगलियानो अपने ‘फिफ्थ एमेंडमेंट’ के अधिकार का इस्तेमाल करेगा और 6 जून 2016 को बयान दर्ज कराने के नोटिस पर गवाही नहीं देगा।
ज्यूडिशियल वाच के अध्यक्ष टॉम फिटन ने सीएनएन से कहा, ‘फिफ्थ एमेंडमेंट’ पर अधिकार जताना एक सिविल प्रक्रिया है और इसकी तरह इसके उलझाव भी हैं। हम लोग जो कुछ कर सकते हैं वह करने जा रहे हैं।
पैगलियानो ने लीबिया के बेनगाजी में अमेरिका ठिरानों पर आतंकी हमले के मामले पर संसद की प्रवर समिति के समक्ष गवाही से बचने के लिए पिछले साल भी इसी पांचवें संशोधन का सहारा लिया था। यह संसदीय समिति लीबिया स्थित बेनगाजी में वर्ष 2012 में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले के मामले की जांच के लिए गठित की गई थी।
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