Iran War Crises: ईरान में सत्ता परिवर्तन और परमाणु बम बनाने से रोकने के नाम पर हमला करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब तेल पर कब्जे की बात कर रहे हैं. ट्रंप की यह बदलती नीति और बयान बता रही है कि 32 दिन से जारी ईरान जंग ट्रंप के लिए आसान नहीं रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक होर्मुज से लेकर खार्ग तक ट्रंप कई मुश्किलों में फंस गए हैंईरान की अंडरग्राउंड फैसेलिटी में रखे 60 फीसदी तक संवर्धित 440 किलो के यूरेनियम को कब्जे में लेने का ऑपरेशन काफी जटिल है.
ग्राउंड ऑपरेशन के लिए उतरे सैनिकों पर बंधक बनने से लेकर ड्रोन-मिसाइलों से हमले का खतरा है. अमेरिका के पूर्व मरीन इंटरोगेटर और काउंटर-इंटेलिजेंस एजेंट जोनाथन हैकेट ने ‘डेली मेल’ को बताया कि यह याद रखना जरूरी है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नतान्ज, इस्फहान और फोर्डो जैसी जगहों तक ही सीमित नहीं है. उनके पास 10 अलग-अलग ठिकाने हैं. उनके पास 20 लाख किलोग्राम यूरेनियम है, जिसे अभी तक सघंद खदान से निकाला नहीं गया है.खार्ग से ईरान अपने 90 फीसदी तेल का निर्यात जरूर करता है लेकिन सिर्फ इस पर कब्जे से बात नहीं बनेगी. ईरान के उस इलाके में दर्जनों छोटे-बड़े द्वीप और हैं. ईरान होर्मुज में खड़े 18 मिलियन बैरल से लदे टैंकरों को निशाना बना सकता है. साथ ही खार्ग पर कब्जे को लंबे समय तक बरकरार रखना मुमकिन नहीं है. ये हमेशा ईरान के निशाने पर रहेगा.
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