छिंदवाड़ा-मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। 7वें बच्चे ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। जिन दवाओं से बच्चों को आराम मिलना चाहिए था, वही उनकी जान जाने की वजह बन गईं।
जांच में सामने आया कि खांसी की सिरप में व्हीकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाला केमिकल एथिलीन ग्लाइकॉल और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल मिला हुआ था। यह वही जहरीला केमिकल है, जिसे गाड़ियों के कूलेंट और एंटी फ्रीज में इस्तेमाल किया जाता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी किडनी और दिमाग को बुरी तरह नुकसान पहुंचा देती है।
बच्चों की मौत के पीछे जहरीली खांसी की दवा- एक्सपर्ट
सीनियर नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि बच्चों की पेशाब बननी बंद हो गई थी। यह स्थिति एथिलीन ग्लाइकॉल (EG) और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की वजह से हुई। दोनों कंपाउंड खांसी की सिरप में मिलावट के कारण बच्चों के शरीर में पहुंचे। इससे उनकी किडनी खराब हुई और मौत हो गई।
यह कोई पहला मामला नहीं है। वेस्ट अफ्रीकी देश गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में भारत निर्मित खांसी की दवाओं से सैकड़ों बच्चों की मौत हो चुकी है। उस समय भी यही जहरीले केमिकल जिम्मेदार पाए गए थे। इन घटनाओं ने भारतीय दवा उद्योग की अंतरराष्ट्रीय छवि को गहरी चोट पहुंचाई थी।
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