शहीद के परिजनों ने पांच घंटे तक बबलू सिंह की अंत्येष्टि नहीं होने दी। पहले तो घरवाले अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे, बाद में बारिश ने अड़ंगा डाला। अंत में टिन शेड लगाकर अंत्येष्टि की गई।
शहीद बबलू का पार्थिव शरीर सुबह करीब 7 बजे गांव झंडीपुर पहुंचा। वहां उनकी पत्नी को नौकरी और पेट्रोल पंप की मांग को लेकर शहीद के परिजनों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
विरोध के चलते शहीद की अंत्येष्टि रुकी रही। एमएलसी संजय लाठर, डीएम व एसएसपी भी घरवालों को मनाने में जुटे रहे, लेकिन वे नहीं माने। घरवाले शहीद के दोनों भाइयों के लिए नौकरी और 5 करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे।
करीब 10.30 बजे तक ये सब चलता रहा। इसके बाद बारिश होने लगी। बड़ी मुश्किल से घरवालों को समझा-बुझाकर टिन शेड लगाकर शहीद की अंत्येष्टि की गई।
परिजनों का आरोप है कि बारिश के चलते जिला प्रशासन ने कोई इंतजाम नहीं किए। पांच घंटे के विरोध के बाद शहीद को अंतिम विदाई दी गई। छोटे बेटे दरुणा ने पिता को मुखाग्नि दी।
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