तेल अवीव, 4 अगस्त (आईएएनएस)। इजरायली संसद ने एक कानून पारित किया है जिसमें आतंकवाद के अपराधों के लिए 14 साल से कम उम्र के नाबालिगों को भी आतंकवाद कानून के तहत जेल की सजा दी जाएगी।
एफे न्यूज की खबर के अनुसार, संविधान सभा नीसेट ने बुधवार को कथित ‘यूथ बिल’ के पक्ष में मतदान किया। इसके 32 सदस्यों ने इस विधेयक के पक्ष में मतदान किया जबकि 16 ने विरोध किया। इनके अलावा एक सदस्य अनुपस्थित रहा।
नया कानून न्यायाधीशों को 12 वर्ष तक के बच्चों को हत्या, नरसंहार के प्रयास या कथित आतंक फैलाने जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त दोषी करार दिए बच्चों को सजा देने में सक्षम होंगे।
एक बयान में कहा गया है कि इस कानून के बन जाने के बाद भी जब किशोर हिरासत में रखें जाएं तो अदालतें इस बात पर बहस करा सकती हैं कि उन्हें जेल भेजना है या नहीं।
कहा गया है कि हाल के कुछ महीनों में हमलों की गंभीरता के मद्देनजर नाबालिगों सहित और अधिक आक्रामक रुख की मांग गंभीरता को दर्शाता है।
इस विधेयक को सत्तारूढ़ दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी की एम. के. अनात बर्को ने प्रायोजित किया है। उन्होंने कहा कि उनके लिए जिनकी हत्या दिल में चाकू घोंपकर किया गया, यह कोई मायने नहीं रखता कि बच्चा 15 साल का है या 12 साल का।
उन्होंने कहा कि इजरायल के समाज ने ऐसे बहुत सारे मामले देखे हैं जिनमें आत्मघाती हमला करने वाले 11 साल के बच्चे थे। शायद यह कानून उन नाबालिगों को नरसंहार के लिए इस्तेमाल होने से रोक सके।
नीसेट ने पिछले साल जुलाई में एक विधेयक पारित किया था जिसमें किसी चलती हुई गाड़ी पर पत्थर फेंकने वाले को 20 साल तक कैद की सजा हो सकती है बशर्ते वे पत्थर नुकसान पहुंचाने के इरादे से फेंके गए थे, यह साबित किया जा सके।
दूसरी ओर यदि इरादे का कोई सबूत नहीं हो तो भी सरकार पत्थर फेंकने वालों को 10 वर्ष तक जेल में रख सकती है।
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