यहां प्रधानाध्यापक धनसिंह कुरेटी, शिक्षक जयमाला, भगवती वर्मा और दीपिका लहरे के अभिनव प्रयास से बच्चे स्वच्छता की भी पढ़ाई कर रहे हैं। यहां स्कूल में बच्चों को दिया जाने वाला मध्याह्न भोजन बकायदा बैठा कर गर्मागर्म परोसा जाता है। इसके लिए स्कूल में चौकी की व्यवस्था की गई है।
इतना ही नहीं, यहां बच्चों को भोजन से पहले हाथ धोने का तरीका भी बताया जा रहा है। हाथ धुलाई के दौरान होने वाली अव्यवस्था से बचने के लिए शिक्षकों ने एक बड़े से ड्रम में 4 नल भी लगवाएं हैं, ताकि बच्चे आसानी से हाथ धो सकें और पानी की बबार्दी भी कम हो।
इसके साथ ही शिक्षकों ने स्वनिर्मित रूमाल भी बच्चों के हाथ पोंछने के लिए बनाए हैं और हर बच्चे को एक-एक रूमाल वितरित किए गए हैं। पीने के पानी में फिल्टर लगवाया गया है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत इस स्कूल का शौचालय काफी स्वच्छ है।
आमतौर पर मध्याह्न भोजन के रसोइए की कोई खास पहचान नहीं दिखाई देती है। लेकिन यहां खाना परोसने वाली रसोइया ने बकायदा गाउन पहनकर मध्याह्न भोजन परोसती दिखी। बच्चों को चौकी में लाइन से बैठाकर भोजन कराया जा रहा है।
इस स्कूल के सभी बच्चे प्रार्थना के दौरान एक साथ लयबद्ध होकर गिनती और पहाड़ा भी सुनाते हैं। बच्चे एक से दस तक गिनती लय के साथ गाते हैं। शिक्षकों का कहना है कि इससे बच्चों को गणित के सवाल हल करने में मदद मिलती है।
प्राथमिक शाला गोलागुड़ा बालक आश्रम कुड़मेलपारा के शिक्षक हर दिन श्यामपट के ऊपरी हिस्से में सुवाक्य लिखते हैं और नीचे बच्चों के द्वारा प्रतिदिन सुवाक्य लिखा जाता है। दक्षिण बस्तर के सुकमा क्षेत्र में शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता की ऐसी पढ़ाई वाकई प्रशंसनीय है।
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