गायकी का भाषा से कोई लेना-देना नहीं : दिलबाग (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। पंजाबी गायक दिलबाग सिंह केवल पंजाबी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके हैं। फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ के गीत ‘मारी गली’ से बॉलीवुड में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा चुके दिलबाग का मानना है कि भाषा का गायकी से कोई लेना-देना नहीं होता।

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। पंजाबी गायक दिलबाग सिंह केवल पंजाबी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि बॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेर चुके हैं। फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ के गीत ‘मारी गली’ से बॉलीवुड में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा चुके दिलबाग का मानना है कि भाषा का गायकी से कोई लेना-देना नहीं होता।

पाकिस्तान के युवा गजल गायक आमिर अली के नए अलबम ‘नहीं मिलना’ के प्रचार के दौरान आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में दिलबाग से जब पूछा गया कि अपने प्रशंसकों के लिए वह क्या नया ला रहे हैं, तो उन्होंने बताया, “इस समय मेरा एक अलबम तैयार है, जिसमें मैंने बहुत सारे गाने गाए हैं। पंजाबी फिल्म ‘इश्कनामा’ में मैं एक रोमांटिक गाना गा रहा हूं। मैं एक पॉप सिंगर हूं, इसलिए मैं कई पॉप गानों पर काम कर रहा हूं, उम्मीद है कि अलबम नवंबर तक रिलीज हो जाएगा।”

फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ का गाना ‘म्हारी गली’ में अपनी आवाज का जलवा बिखेरने वाले दिलबाग से जब पूछा गया कि क्या इस समय आप बॉलीवुड फिल्म में भी गाना रहे हैं, तो उन्होंने बताया, “मैं बॉलीवुड फिल्म ‘शादी अभी बाकी है’ का शीर्षक गीत गा रहा हूं। इसके अलावा मैं दो और फिल्मों के लिए गाने तैयार कर रहा हूं, जिनके अभी नाम तय नहीं हुए हैं।”

इस समय जब भारत और पाकिस्तान के संबंधों में उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर भारत के पॉप सिंगर दिलबाग पाकिस्तानी गजल गायक आमिर अली के अलबम का प्रचार कर दुनिया को प्यार और दोस्ती का संदेश दे रहे हैं।

दिलबाग से जब पूछा गया कि आमिर के इस गीत में उनका क्या योगदान है, तो उन्होंने बताया, “इस गजल की पूरी कंपोजीशन मेरे ही घर में पूरी हुई है। आमिर ने इसे बनाया है और मैंने इसके बदले उन्हें अच्छा-अच्छा खाना खिलाया है। मेरा यही योगदान है। इस गजल के बनने के दौरान हालांकि वह हर शेर पर मेरी सलाह लेते थे, सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हम यह गजल गुनगुनाते थे। मुझे यह बहुत पसंद है और मेरा यकीन है कि यह पूरी दुनिया को पसंद आएगी।”

गुलाम अली की गजलों की पूरी दुनिया दीवानी है, केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत और विदेशों में भी उनकी गजलों को लोग पसंद करते हैं। ऐसे में आमिर की तुलना उनके वालिद गुलाम अली से होना लाजमी है। क्या आमिर की यह गजल गुलाम अली की नज्मों की तरह लोगों के जेहन में उसी हद तक उतर पाएगी?

इस सवाल पर दिलबाग ने कहा, “मेरे हिसाब से आमिर की तुलना उनके पिता से करना सही नहीं है। यह उनकी खुशनसीबी है कि गुलाम अली साहब उनके पिता हैं। यह उनके लिए गर्व की बात है कि वह गुलाम अली के बेटे हैं। मैं मानता हूं कि आमिर बहुत ही प्रतिभाशाली हैं, इसलिए मुझे लगता है कि लोग जितना गुलाम अली साहब को पसंद करते हैं, उतना ही आमिर को भी करेंगे।”

उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी आमिर के गीतों को पसंद कर रही है और उसका समर्थन कर रही है। मैं भी उन्हें बहुत पसंद करता हूं। उनका यह गीत युवाओं को देखकर तैयार किया गया है और यह युवाओं को बहुत पसंद आएगा। उनके संगीत में जरूर कोई बात है, इसलिए शायद मैं भी उनके साथ खड़ा हूं।”

पंजाबी पॉप सिंगर का गजल गायक के साथ तालमेल कैसे बना, इस सवाल पर दिलबाग ने कहा, “पॉप हो या गजल, संगीत की तर्ज शास्त्रीय ही रही है। हम जब गानों को सीखना शुरू करते हैं, तो शुरुआत शास्त्रीय संगीत से ही होती है। इसके बाद हम अपने उस जॉनर को तलाशते हैं, जिसमें हम अधिक सहज महसूस करते हैं और उसमें अधिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने बचपन में जब गाना सीखना शुरू किया था, तो मुझसे शास्त्रीय संगीत को सीखने के लिए कहा गया। मैं गुलाम अली साहब की गजलें सुनता था।”

लिबाग ने आगे कहा, “मेरे गुरु गायक मीका जी के पिता अजमेर सिंह चंदन थे। मैंने उनसे एक गाने पर कहा था कि इतना मुश्किल गाना मैं नहीं गा सकता, इस पर उन्होंने मुझे सलाह दी कि तुम गाना सुनो। क्योंकि जिसको गाना सुनना आ जाए, उसको गाना आ जाता है। अगर आपका आधार शास्त्रीय संगीत रहा है, तो आप किसी भी तरह का गाना गा सकते हैं। भाषा का गायिकी से कोई लेना-देना नहीं होता है, बस आपके अंदर संगीत की समझ होनी चाहिए।”

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