नई दिल्ली, 13 सितम्बर (आईएएनएस)। स्थानीय दुकानदारों और ऑनलाइन खरीददारी करने वालों के बीच की खाई को पाटने के लिए मंगलवार को दिल्ली-एनसीआर में प्राइसमैप नाम का ऐप लांच किया गया। इस ऐप का मकसद खरीददारों को उन वस्तुओं की कॉम्पेटिटिव कीमत जानने की आजादी देना है, जो वे खरीदना चाहते हैं।
ई-कॉमर्स प्लेटफार्म्स के आने के बाद स्थानीय और खुदरा व्यापार पर काफी असर पड़ा है। ऐसे स्थानीय खुदरा छोटे और बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या 1.6 करोड़ के करीब है और ये देश के 60 अरब डॉलर के खुदरा व्यापार में बड़े हिस्सेदार हैं। साथ ही ये सबसे अधिक रोजगार भी प्रदान करते हैं।
स्थानीय खुदरा व्यापारियों ने अपने हितों की रक्षा के लिए कई बार आवाज भी उठाई है लेकिन अब तक इस दिशा में ज्यादा कुछ किया नहीं गया है। ऐसे में प्राइसमैप को खुदरा व्यापारियों और खरीददारों के बीच शॉपिंग के ‘गूगल’ के तौर पर पेश किया गया है। इसी लिए इसका पंच लाइन-‘देख के लो’ रखा गया है।
स्थानीय खुदरा बाजार के लिए ‘प्रॉडक्ट और प्राइस डिस्कवरी ऐप’ होने के नाते प्राइसमैप लोगों को ऑनलाइन रहकर अपने मनमाफिक कीमत पर पास की दुकानो से चीजें खरीदने की सुविधा और आजादी प्रदान करता है। सबसे अहम बात यह है कि यह उपयोग में लाने के लिहाज से खुदरा व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए बड़ा आसान है।
एक दुकानमालिक को सिर्फ करना यह है कि ऐप डाउनलोड करना है और खुद को वहां रजिस्टर करना है। रजिस्टर करने के बाद उन्हें ऑनलाइन उपभोक्ताओं की ओर से स्पेसिफिक प्रोडक्ट पर क्वेरी आने लगेंगे। इस दौरान दुकानदार को अपनी दुकान पर रखे सामान को ब्लॉक करने या फिर ऑनलाइन अपलोड करने की जरूरत नहीं है।
दूसरी ओर, सभी उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सर्च करके पसंद किए गए प्राडक्ट का लिंक ऐप पर शेयर करना है। इसके बाद प्राइसमैप के जरिये उन्हें पता चल जाएगा की पास में किन किन दुकानों में वह प्रोडक्ट है और कौन ऑनलाइन से भी सस्ता बेच रहा है।
एक प्राइसमैप यूजर को शहरी ट्रैफिक और पाकिर्ंग की समस्याओं से जूझते हुए इस बाजार से उस बाजार या फिर इस दुकान से उस दुकान जाने की जरूरत नहीं है। उन्हें बस यह पता चलने की जरूरत है कि वह जिस वस्तु या प्रॉडक्ट की तलाश है वह सबसे अच्छी कीमत पर किस दुकान पर मौजूद है। प्राइसमैप उन्हें यह पता करके देता हैे।
ग्राहक को बस उस दुकान से कुछ तस्वीरें और कीमत प्राप्त करने की देरी है और वह अपने करीबी दुकान पर जाकर उस वस्तु को देख सकता है और खरीद सकता है।
इस क्रांतिकारी ऐप के लांच के अवसर पर प्राइसमैप के संस्थापक और सीईओ सुरेश काबरा ने कहा, “ऐसे में जबकि बड़े व्यवसायिक प्रतिष्ठान हल्ला मचा रहे हैं, हमने एक बड़ी समस्या का समाधान किया है। दूसरी ओर जबकि छोटे दुकानदारों को नुकसान हो रहा था, हमने उपभोक्ताओं को यह यह यकीन दिलाने की कोशिश की कि उन्हें वस्तुएं सस्ती दरों पर पास की दुकानो से मिल रही हैं। हमने एक शोध में पाया है कि 10 वस्तुओं में से आठ बार ऑनलाइन शॉपिंग की वस्तु करीबी दुकान पर सस्ती कीमत पर उपलब्ध हो रही है पर उपभोक्ताओं को यह पता ही नहीं है। ऊपर से ई-कॉमर्स कम्पनियां कितनी गलत और दोषपूर्ण वस्तुएं लोगों तक पहुंचाती हैं। इसने प्राइसमैप ऐप को जन्म दिया।”
प्राइसमैप ने आने वाले दिनों में दिल्ली के सभी बड़े बाजारों में इवेंट्स आयोजित कराने का फैसला किया है, जिससे कि इस ऐप को लेकर दुकानदारों और खरीददारों के बीच जागरुकता पैदा की जा सके।
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