रियो पैरालम्पिक (भाला फेंक) : विश्व कीर्तिमान रच झाझरिया ने जीता स्वर्ण (लीड-1)

रियो डी जनेरियो, 14 सितम्बर (आईएएनएस)। भारतीय पैरा-एथलीट देवेंद्र झाझरिया ने अपने ही पूर्व रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया विश्व कीर्तिमान रच रियो पैरालम्पिक की भाला फेंक स्पर्धा (एफ 46) में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

उन्होंने इससे पहले एथेंस पैरालम्पिक-2004 में 62.15 मीटर की दूरी के साथ विश्व कीर्तिमान रचते हुए स्वर्ण पदक जीता था।

देवेंद्र ने ब्राजीलियाई महानगर रियो डी जनेरियो में मंगलवार को हुई स्पर्धा के फाइनल में अपने पूर्व विश्व रिकॉर्ड में सुधार करते हुए 63.97 मीटर की दूरी हासिल की और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

झाझरिया ने तीसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया। विश्व रैंकिंग में इस समय तीसरी वरीयता प्राप्त झाझरिया के स्वर्ण पदक जीतने के बाद फिर से शीर्ष स्थान पर पहुंचने की संभावना है।

विश्व के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी चीन के चुनलियांग गुयो ने इस स्पर्धा में 59.93 मीटर की दूरी तय कर रजत पदक अपने नाम किया। श्रीलंका के दिनेश हेराथ प्रीयंथा ने 58.23 मीटर की दूरी के साथ कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।

झाझरिया ने पहले प्रयास में 57.25 मीटर की दूरी तय की और अपने दूसरे प्रयास में सुधार करते हुए 60.70 मीटर की दूरी तक भाला फेंका। तीसरे प्रयास में उन्होंने अपने प्रदर्शन में और सुधार किया और नया विश्व कीर्तिमान रचते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया।

इस स्पर्धा में देवेंद्र के साथ भारतीय एथलीट रिंकु हुड्डा और सुंदर सिंह गुर्जर ने भी हिस्सा लिया था। रिंकु 54.39 मीटर के करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ पांचवां स्थान हासिल कर सके, जबकि सुंदर स्पर्धा की शुरुआत कर पाने में असफल रहे।

भारत के पास अब पैरालम्पिक पदक तालिका में कुल चार पदक हैं, जिसमें दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक शामिल है।

राजस्थान के चूरू के रहने वाले देवेंद्र को 2004 में अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। वह इस पुरस्कार को हासिल करने वाले पहले पैरालम्पिक एथलीट भी रहे।

आठ वर्ष की आयु में पेड़ पर चढ़ने के दौरान देवेंद्र पर बिजली गिर गई थी, जिसके कारण उनके बायां हाथ कट गया लेकिन इस कमी को उन्होंने अपना हथियार बनाया और अपने सपनों को पूरा किया।

देवेंद्र लियोन में 2013 में हुए एथलेटिक्स विश्व चैम्पियनशिप में भी स्वर्ण पदक विजेता रहे। उन्होंने पिछली बार 12 साल पहले पैरालम्पिक खेलों में एफ-46 स्पर्धा में हिस्सा लिया था, जबकि 2008 और 2012 पैरालम्पिक खेलों में हिस्सा नहीं ले पाए थे।

रियो पैरालम्पिक के सातवें दिन मंगलवार को इससे पहले अंकुर धामा पुरुषों की 1,500 मीटर दौड़ के पहले दौर में क्वालीफाई करने से चूक गए। उन्हें इस स्पर्धा में 11वां स्थान हासिल हुआ। कुल 17 धावकों ने इस स्पर्धा में हिस्सा लिया।

अंकुर ने चार मिनट 37.61 सेकेंड का समय निकाला।

मंगलवार को ही तैराकी में सुयश जाधव भी पुरुषों की 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले स्पर्धा के फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए। वह हीट-2 में छठे स्थान पर रहे। उन्होंने दूरी तय करने में तीन मिनट 1.05 सेकेंड का समय लिया।

झाझरिया से पहले रियो पैरालम्पिक में मरियप्पन थांगावेलू ने भारत के लिए पुरुषों की ऊंची कूद स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। इसी स्पर्धा में वरुण भाटी ने कांस्य पदक अपने नाम किया था।

गोला फेंक महिला खिलाड़ी दीपा मलिक ने वहीं गोला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीता और पैरालम्पिक खेलों में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया।

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