बुडापेस्ट, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। हंगरी में लोगों ने शरणार्थी कोटे से संबंधित यूरोपीय संघ (ईयू) की योजना खारिज कर दी है। इसके लिए रविवार को सरकार की ओर से जनमत संग्रह कराए गए, जिसके 98.56 प्रतिशत मतदान की गणना की जा चुकी है।
नेशनल इलेक्शंस ब्यूरो के मुताबिक, करीब 98.28 प्रतिशत लोगों ने ईयू की योजना को ‘ना’ कहा।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की खबर के अनुसार, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने कहा कि इस जनमत संग्रह का मुख्य काम जनता की राय जानना था और मतदाताओं ने बड़ी संख्या में ‘नहीं’ विकल्प को चुना है जो स्पष्ट रूप जनता की इच्छा को दर्शाता है।
सत्तारूढ़ पार्टी फिदेस्ज के उप प्रमुख गर्गेली गुल्यास ने कहा कि ओरबान को स्पष्ट जनमत हासिल हो गया है।
हालांकि हंगरी के कानून के मुताबिक किसी जनमत संग्रह के परिणाम को वैध होने के लिए जरूरी है कि मतदान का प्रतिशत 50 से अधिक हो और रविवार के जनमत संग्रह में मात्र 39.8 प्रतिशत वैध मतदान हुआ। इसलिए वाम पंथी विपक्ष, जिसने जनमत संग्रह का बहिष्कार किया था, ने भी अपनी जीत का दावा किया है।
विपक्षी दल डीके पार्टी के फेरेंक ग्यूरकसानी ने ओरबान से इस्तीफे की मांग की है।
वहीं, एमएसजीपी पार्टी के अध्यक्ष ज्यूला मोलनार ने जनमत संग्रह को गैरकानूनी करार दिया है।
इसमें पूछा गया था, ‘क्या आप चाहते हैं कि ईयू को इसका अधिकार दिया जाए कि जो हंगरी के नागरिक नहीं हैं, उन्हें हंगरी में बाध्यकारी रूप से बसाया जाए और वह भी राष्ट्रीय असेंबली की स्वीकृति के बगैर?’
हंगरी में शरण के लिए 1.74 लाख लोगों ने आवेदन दिया है।
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