रांची, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। चंद्रमति उरांव अविवाहित हैं और शादी के बंधन में बंधने की उनकी इच्छा भी नहीं है, लेकिन यह उन्हें 22 यतीम बच्चों की मां की भूमिका निभाने से रोक नहीं पाया है। ये बच्चे अपने जैविक माता-पिता को नहीं जानते हैं।
चंद्रमति (32) जब आठवीं कक्षा में पढ़ती थीं तभी उनके मिशन के बीज बो दिए गए थे और उसी समय उन्होंने सामाजिक कार्य में अपने नन्हे कदम बढ़ा दिए थे। उन्होंने साल 2002 में स्नातक की उपाधि हासिल की और सन 2006 में राज्य की राजधानी रांची के पड़ोस में स्थित बड़ा तालाब मोहल्ले में 1500 रुपये प्रति माह की दर से किराये पर एक पांच कमरे के मकान से अपना मिशन शुरू किया, जिसे अब ‘आंचल शिशु आश्रम’ कहा जाता है।
व्यवस्था को औपचाारिक रूप देने के लिए साल 2011 में एक ट्रस्ट का गठन किया गया। तीन साल पहले भवन के किराये का भुगतान करना बंद दिया गया, क्योंकि मकान मालिक ने निर्णय किया कि वह बिना पैसे के भी रह सकते हैं।
चंद्रमति ने आईएएनएस से कहा, “मैंने इस काम के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। मैं शादी नहीं करूंगी और बच्चों के लिए काम करना जारी रखूंगी।”
आश्रम के अधीक्षक और ट्रस्ट के प्रमुख सुशील कुमार ने आईएएनएस से कहा, “चंद्रमति की सामाजिक कार्य की पृष्ठभूमि पर विचार करते हुए उन्हें आश्रम की गृह संचालिका बनाया गया है। वह अपने बच्चे जैसा व्यवहार बच्चों के साथ करती हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर दिया है।”
आश्रम में रसोइया समेत तीन कर्मचारी हैं। यह पूरी तरह गैर सरकारी संगठनों और रांची के संपन्न लोगों पर निर्भर है जो यह सुनिश्चित करने के लिए नगद और वस्तु से योगदान करते हैं कि बच्चों का भरण पोषण अच्छे ढंग से हो और उनके पास सही स्कूल ड्रेस व किताबें हों।
चंद्रमति ने कहा, “बच्चे निजी और सरकारी स्कूलों में भेजे जाते हैं। हमें स्कूल फीस नहीं देनी पड़ती है, लेकिन हमें स्कूल ड्रेस, भोजन और अन्य चीजों की व्यवस्था करनी पड़ती है। हमें गैर सरकारी संगठनों और निजी लोगों से सहयोग मिलता है।”
उन्होंने कहा, “हम बच्चों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी हम लोगों को ऐसा करने से रोकती है।”
आश्रम में लड़कों और लड़कियों की संख्या समान है। लड़कों की उम्र 3 साल से 7 साल के बीच है, जिसके बाद इन्हें विभिन्न स्कूलों में दााखिला दिलाया जाता है। लड़कियां 12 से 13 साल की उम्र तक आश्रम में रहती हैं। इसके बाद उनके अलग रहने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। कुछ मामलों में जब इनकी उम्र हो गई तो चंद्रमति ने लड़कियों की शादियां भी कराई हैं।
चंदमति बच्चों की प्रतिभा से काफी खुश हैं और उन्होंने कहा कि लड़कियां अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट हैं और जीवन में अपनी छाप छोड़ेंगी। वह स्वीकार करती हैं कि कभी-कभी उन्हें संसाधन जुटाने में मुश्किल होती है, लेकिन वह मुस्कुराते हुए परिस्थितियों का सामना करती हैं।
dharmpath.com dharmpath