मुबंई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अमिताभ कांत ने बुधवार को कहा कि भारत की जरूरत एक नकदी रहित समाज में परिवर्तित हो जाने की है। डिजिटल भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना होगा।
वैश्विक भुगतान प्रौद्योगिकी कंपनी, वीसा इंक की रपट जारी करने के अवसर पर कांत ने कहा, “डिजिटल भुगतान डिजिटल भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने और वित्तीय समावेशन की मुहिम में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” रपट का शीर्षक ‘भारत में डिजिटल भुगतान संवर्धन : पंचवर्षीय परिदृश्य’ है।
कांत ने कहा कि डिजिटल भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने से सिर्फ लोगों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने में ही नहीं, रोजगार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
अध्ययन के अनुसार, “नकदी की लागत से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.7 प्रतिशत का एक बड़ा बोझ पड़ता है।”
भारत में साल 2015 में डिजिटल लेनदेन की प्रति व्यक्ति संख्या 10 रही। इसकी तुलना में यह ब्राजील में प्रति व्यक्ति 163, दक्षिण कोरिया में 420 और स्वीडन में 429 रही है।
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