नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करने से पहले दूरसंचार, तंबाकू, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में इसकी कर की दरों और संरचना को लेकर विसंगतियों का जल्द समाधान करना चाहिए।
उद्योग जगत की बुधवार को जारी एक रपट में यह बातें कही गई हैं।
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा, “हम एक संक्रमण काल में हैं, कई उद्योग क्षेत्रों के सामने नई कर व्यवस्था के अनुकूल बनने की चुनौती है। जीएसटी एक लीक से हटकर सुधार है। इसलिए इसे लागू करने में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मौजूदा कर संरचना में कम से कम व्यावधान हो।”
एसोचैम और कर सलाहकार संस्था केपीएमजी के संयुक्त पत्र में कहा गया है, “तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर सामान्य कर से अधिक लगाने के बजाए इस समूचे सेक्टर को ही सामान्य श्रेणी में रखना चाहिए। ताकि बड़े पैमाने पर अवैध व्यापार को समाप्त किया जा सके।”
पत्र में कहा गया है कि जीएसटी व्यवस्था के तहत दोहरे कराधान या सिगरेट जैसी चीजों पर अधिक कर लगाने का प्रस्ताव है। लेकिन तंबाकू उद्योग में सिगरेट से कहीं ज्यादा खपत अन्य उत्पादों की होती है। इसलिए केवल सिगरेट पर अधिक कर लगाना उपयुक्त नहीं होगा। इससे केवल एक उत्पाद से कर इकट्ठा होने के बजाए कई उत्पादों से कर मिलेगा और सरकार के पास कर की दरें कम रखने के बाद अधिक राजस्व इकट्ठा होगा।
तंबाकू उद्योग तेल और गैस क्षेत्र के बाद भारतीय आबकारी राजस्व में दूसरा सबसे बड़ा योगदान देता है।
इसी तरह, इसमें दूरसंचार क्षेत्र के लिए चेताया गया है कि जीएसटी से कार्यशील पूंजी लागत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि आयात कर की दरों में वृद्धि के कारण खरीद की कीमत बढ़ जाएगी।
इसी तरह, कागज और कपड़ा क्षेत्र पर भी जीएसटी के प्रभाव को लेकर एक आदर्श स्थिति को खोजने के लिए सुझाव दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस मामले में भारत में प्रस्तावित जीएसटी व्यवस्था के तहत अगर उच्च कर दर चुना जाता है, तो लंबी अवधि में हम अत्यधिक प्रतिस्पर्धी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी बाजार हिस्सेदारी खो देंगे।
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