कोच्चि, 7 नवंबर (आईएएनएस)। केरला ब्लास्टर्स टीम मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होने वाले हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) मुकाबले में एफसी गोवा से भिड़ेगी। इस टीम को मार्की खिलाड़ी एरॉन ह्यूज के स्वदेश लौटने से बड़ा झटका लगा है। अब देखने वाली चीज यह है कि क्या इसका असर उसके प्रदर्शन पर पड़ेगा या नहीं?
केरल ने काफी सोच-समझकर एरॉन को मार्की खिलाड़ी चुना था। वह अन्य मार्की खिलाड़ियों की तुलना में कम उम्र के हैं। अभी उनमें अतर्राष्ट्रीय फुटबाल भी बाकी है। ऐसे में लगा था कि एरॉन आईएसएल के तीसरे सीजन में गहरी छाप छोड़ेंगे।
अब जबकि उत्तरी आयरलैंड ने अपना डिफेंस मजबूत करने के लिए एरॉन को वापस बुला लिया है, केरल को इसे भारी नुकसान होने जा रहा है। अब केरल को बाकी का सफर अपने इस सबसे प्रभावशाली मार्की खिलाड़ी के बगैर ही पूरा करना होगा।
केरल के कोच स्टीव कोपेल ने कहा, “जब हमने उन्हें मार्की खिलाड़ी के तौर पर अपने साथ जोड़ा था, हमने उनकी उम्र और यूरोपीयन चैम्पियनशिप में उनके प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा था। हमने सोचा था कि उनका अंतर्राष्ट्रीय करियर अब खत्म हो गया है लेकिन अपने खिलाड़ियों के चोटिल से होने से जूझ रही उत्तरी आयरलैंड टीम ने उन्हें फिर से टीम में शामिल करते हुए हमें बड़ा झटका दिया है।”
एरॉन के अलावा केरल को अपने आगे का सफर हैती के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी डकेंस नाजोन के बगैर जारी रखना होगा। बेंगलुरू एफसी के लिए एएफसी कप में खेल चुके रीनो एंटो और सीके विनीत को कोपेल सीधे मैदान में नहीं उतार सकते। ऐसे में एरॉन की गैरमौजूदगी से केरल को सबसे अधिक नुकसान होगा।
कोपेल हालांकि मानते हैं कि उनके खिलाड़ी इस नुकसान से उबरते हुए बेहतर प्रदर्शन करेंगे और एरॉन की कमी नहीं खलने देंगे। कोच ने कहा, “वह हमारे मार्की खिलाड़ी थे। हमने उन्हें अपने साथ इसीलिए जोड़ा था कि क्योंकि वह एक अच्छे खिलाड़ी हैं। उन्हें खोना एक नुकसान है। जब एक दरवाजा बंद होता है तो वह किसी अन्य के लिए खुलता है। यह एक मौका है। जब आपके पास एक बड़ी टीम हो और खिलाड़ियों को मौका मिलता है तो वे इसे लपकना चाहते हैं।”
केरल के पास लीग की सबसे मजबूत डिफेंस लाइन है लेकिन इसकी मजबूती आपसी साझेदारी और तालमेल पर आधारित रही है। इसमें एरॉन और सेड्रिक हेंगबार्ट की अहम भूमिका रही है। अब देखने वाली बात यह है कि एरॉन के बगैर भी यह पहले जैसी मजबूत दिखती है।
जहां तक एफसी गोवा की बात है तो उसकी आक्रमण पंक्ति बहुत अधिक कारगर नहीं रही है। एफसी गोवा ने आठ मैचों में पांच गोल किए हैं और कोच जीको को उम्मीद है कि लीग के दूसरे चरण में उनके स्ट्राइकर बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
जीको ने कहा, “मैं मानता हूं कि मेरे खिलाड़ी चिंता से ग्रसित हैं। उन पर गोल करने और स्कोर अपने पक्ष में करने का दबाव है। जब मैच फिनिश करने की बारी आती है तो वे पिछड़ जाते हैं। उनमें संयम नहीं रह गया है। गोलपोस्ट के सामने वे आक्रामक नजर नहीं आते। इस साल हालांकि गोलकीपरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।”
ऐसे में जबकि जूलियो सीजर चोटिल हैं, जीको को अपने ब्राजीली स्ट्राइकर राफेल कोएल्हो पर भरोसा करना होगा। पुणे के खिलाफ कोएल्हो ने एक शानदार गोल फ्रीकिक पर किया था। इस मैच से पूरे अंक लेकर गोवा की टीम ने खुद को सेमीफाइनल की दौड़ में बनाए रखा था।
गोवा की टीम केरल को अगर उसी के घर में हराने में सफल रही तो वह दो स्थान की छलांग के साथ छठे स्थान पर पहुंच जाएगी। दूसरी ओर, अगर केरल ने यह मैच जीत लिया तो वह सातवें स्थान से शीर्ष-4 में पहुंच जाएगा।
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