वाराणसी, 7 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी पहुंचीं बलूचिस्तान आंदोलन की अगुवा प्रो़ नायला कादरी बचोल ने सोमवार को कहा कि गंगा मां ही हिन्दुस्तान की पहचान है। वाराणसी में संस्कृति संसद में भाग लेने आईं नाएला गंगा घाट पर भी गईं।
उन्होंने कहा, “गंगा एक तहजीब की मां है और हिंदुस्तान की पहचान है। हजारों वर्ष में यहां आए साधु-संतों की रूहानी मौजूदगी गंगा के घाटों पर है, इसलिए यहां आने वालों को नूर मिलता है। मैं बनारस की मुकद्दस जमीन पर पहली बार आई हूं।”
नाएला ने कहा, “मुझे पहली बार यहां गंगा के घाटों को देखने का मौका मिला है। यह मौका मिलना सुकून भरा है, सभी को मां गंगा को साफ रखने के लिए पूरी कोशिश ईमानदारी से करनी चाहिए।”
प्रो़ नायला ने इससे पहले इंडो-बलोच फोरम के दो संयोजक बनाए जाने की घोषणा की। बलूचिस्तान की तरफ से उनके आंदोलनकारी बेटे मीर मजदक बलोच और भारत की तरफ से गंगा महासभा के विनय तिवारी संयोजक होंगे।
इस फोरम की घोषणा रविवार को संस्कृति संसद के दौरान ही हुई थी। सबसे पहले न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने इसकी सदस्यता ली।
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