नई दिल्ली-स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले यानी आज (14 अगस्त) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश को संबोधित किया. उन्होंने 15 अगस्त 1947 को याद करते हुए कहा कि उस दिन भारत गुलामी से आजाद हुआ और देशवासियों ने स्वतंत्र भारत की दिशा तय करने की जिम्मेदारी संभाली. राष्ट्रपति मुर्मु ने स्वतंत्रता संग्राम के सभी सेनानियों को नमन किया और कहा कि आज भी विद्यार्थी, शिक्षक, वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, मजदूर और किसान अपने-अपने काम से देश को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने संविधान में दिए मूल कर्तव्यों का पालन करने वाले हर नागरिक को भी राष्ट्र-निर्माण का अहम भागीदार बताया. राष्ट्रपति ने ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम’ का जिक्र करते हुए देश के प्रति हमेशा जागरूक रहने का संदेश दिया.
राष्ट्रपति मुर्मु ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले स्वतंत्रता आंदोलन और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सामाजिक सुधार व राष्ट्र-निष्ठा के आदर्शों को याद किया. उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को देश विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में याद करता है. बंटवारे के दौरान सांप्रदायिक हिंसा में लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान और हौसला नहीं छोड़ा. आजादी के समय देश के सामने 550 से ज्यादा रियासतों को भारत के साथ जोड़ने की भी बड़ी चुनौती थी. राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने रियासतों को लोकतांत्रिक भारत में मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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