नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। प्रोकैम इंटरनेशनल द्वारा आयोजित एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन राजधानी में होने वाली खेल की सबसे बड़ी प्रतियोगिता है। इस मैराथन में पूरे विश्व से कुल 34,000 लोग हिस्सा ले रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध इस मैराथन का उद्देश्य स्वस्थ दिमाग और स्वस्थ मन के संदेश को बढ़ावा देना है।
इस मैराथन के 2015 संस्करण को पिछले संस्करण की अपेक्षा 98 फीसदी ज्यादा फंड मिला था, जिसे सिविल सोसायटी आर्गेनाइजेशन (सीएसओ) और एनजीओ ने इकट्ठा किया था। एडीएचएम के 2015 संस्करण में कुल 7.26 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इसका असर 15,000 लोगों की जिंदगी पर पड़ा क्योंकि इस पैसे के जरिए कई मुहिम चलाए गए।
रोचक बात यह है कि सभी की मान्यताओं को दरकिनार करते हुए शिक्षा की अपेक्षा स्वास्थय ऐसा क्षेत्र पिछले साल रहा है जिसमें लोगों को फायदा पहुंचा है। स्वास्थ शिविर और स्वास्थय सुरक्षा के माध्यम से कुल 90,716 लोगों को फायदा पहुंचा है। इसके बाद बुजुर्गो की देखभाल की मुहिम के जरिए 25,182 लोगों को इसका फायदा हुआ है।
विभिन्न तरह की मुहिम के माध्यम से 11,490 बच्चों को शिक्षा मिली है। 8,710 विकलांग बच्चों को समर्थन मिला है। 8,380 लोगों को अपना जीवनयापन करने में मदद मिली है। 3,934 बच्चों को पालन घर में पहुंचाया गया है।
एडीएचएम के 2016 संस्करण में अभी तक 5.50 करोड़ का फंड इकट्ठा किया जा चुका है और 30 नवंबर तक लोग सहयोग देना चालू रखेंगे। अभी तक कई कॉरपोरेट घरानों की 112 टीमें अपना रजिस्ट्रेशन मैराथन के लिए करवा चुकी हैं। 48 केयर चैम्पियनों में से प्रत्येक ने औसतन 2.50 लाख रुपये दिए हैं।
175 से ज्यादा व्यक्ति और 40 से ज्यादा बच्चे एवं युवा फंड इकट्ठा कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इस साल ज्यादा से ज्यादा फंड आए।
इंडिया केयर इस प्रतिस्पर्धा का परोपकारी साझेदार है जो सीएसओ और एनजीओ, कंपनी और कई लोगों के साथ जुलाई से लगातार काम कर रहा है और वह मैराथन के बाद भी यह काम जारी रखेगा ताकि एयरटेल दिल्ली मैराथन का असर समाज पर रहे।
इंडिया केयर के चेयरपर्सन मरे कुलशॉ ने कहा , “एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन कई लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। पिछले साल सीएसओ और एनजीओ ने जो फंड इकट्ठा किया था उनके द्वारा मिली फंड के उपयोग की रिपोर्ट ने हमें इस मैराथन से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित किया है।”
प्रोकैम इंटरनेशनल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिलीप जयराम ने कहा, “रनिंग का अपना एक अलग पहलू है। मैराथन के पिछले संस्करण ने 1,50,000 लोगों की जिंदगी पर अपना प्रभाव छोड़ा था। हम प्रोकैम इंटरनेशनल के जरिए उन सभी रनर, डोनर, साझेदार और सरकारी एजेंसियों का इस मैराथन का समर्थन करने और फंड इकट्ठा करने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए हमारे साथ आने के लिए हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं।”
इस अभियान में स्कूली छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और फंड जुटाए हैं।
फंड जुटाने वाले छात्र :
नितिन साहनी : श्री राम स्कूल के कक्षा दसवीं के छात्र नितिश साहनी ने देखने में असक्षम लोगों के लिए एक लाख रुपये से ज्यादा का फंड इकट्ठा किया है। वह बोर्ड के इम्तिहान होने के बावजूद भी इस काम से छुट्टी नहीं लेना चाहते हैं। वह खुद एक जुनूनी धावक हैं।
अर्शिया और रितिका : श्रीराम मिलेनियम नोएडा की छात्र रितिका और अमेटी स्कूल की छात्रा अर्शिया और रितिका स्कील डेवलपमेंट के लिए फंड इकट्ठा कर रही हैं। साथ ही यह दोनों शिक्षा के माध्यम से रोजगार, बदरपुर में रह रहे गरीब बच्चों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं।
भाष्कर घोष : ओरेकल में काम करने वाले भास्कर घोष दिल्ली में ईशा विद्या में स्वंयसेवी हैं। यह संस्था कोयम्बटूर से काम करती है। इस सीएसओ/एनजीओ का लक्ष्य शिक्षा के लिए फंड इकट्ठा करना है। ईशा विद्या ने अभी तक चार लाख रुपये का फंड जोड़ लिया है।
मीरा प्रदीप सिंह : चेशायर होम्स दिल्ली की निदेशक मीरा प्रदीप सिंह ने अभी तक 17 लाख रुपये का फंड जुटा लिया है। यह पहली बार है कि वह दुनिया के सामने आई हैं।
इंडिया केयर यह मानती है कि हजारों को लोग इस मैराथन के प्रायोजकों का साथ देने के लिए अपना समय और पैसा देने के लिए तैयार हैं।
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