उन्होंने कहा कि मछुआ आवास योजना के तहत 1435 आवास बनाने के लिए बजट आवंटित किया गया था। राज्य सरकार ने मछुआ आवास बनाने का शासनादेश जारी किया। लेकिन मात्र 425 आवास का ही लक्ष्य रखा गया जो केंद्र सरकार के बजट में ही समायोजित किया गया। राज्य सरकार ने कोई नया बजट जारी नहीं किया।
निषाद ने कहा कि 17 अतिपिछड़ी जातियों को 30 विभाग की 76 योजनाओं में 7.5 प्रतिशत मात्रात्मक आरक्षण का शासनादेश लोकसभा चुनाव से पूर्व मार्च-2014 में किया गया, लेकिन इसका इन जातियों को कोई लाभ नहीं मिला। सपा सरकार ने मात्रात्मक आरक्षण के नाम पर अति पिछड़ी जातियों को सिर्फ लालीपॉप दिखाया है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार 17 अति पिछड़ी जातियों को सामाजिक न्याय देने की पक्षधर होती तो शिक्षा, नौकरियों व पंचायतों में 7.5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करती। उन्होंने कहा कि 1959 से विमुक्त जातियों मल्लाह, केवट, कहार, लोध, बंजारा, भर, नायक, औंधिया, मेवाती आदि को अनुसूचित जनजाति के समान शिक्षण-प्रशिक्षण में आरक्षण मिल रहा था, जिसे अखिलेश सरकार ने 10 जून, 2013 को समाप्त कर इन जातियों के साथ सामाजिक अन्याय किया।
निषाद ने कहा कि सपा सरकार अति पिछड़ी जातियों को हर स्तर पर पीछे करने व सामाजिक-राजनीतिक न्याय से वंचित करने का ही काम किया है। सपा सरकार मुलायम एंड फैमिली प्राइवेट लि. पार्टी बनकर रह गई है। समाजवाद के नाम पर केवल एक परिवार व जाति को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है।
निषाद ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2013 में ही मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिए जाने व मछुआ आयोग का गठन करने की घोषणा की थी। लेकिन, अभी तक उनकी ये दोनों घोषणाएं सिर्फ घोषणाएं ही बनी हुईं हैं।
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