श्रीनगर, 22 नवंबर (आईएएनएस)। मोहिउद्दीन हाकिम (60) का थोक किराना का पारिवारिक कारोबार पिछले 30 सालों से चल रहा है। लेकिन, उन्हें कभी नकदी को लेकर इतनी ज्यादा परेशानी नहीं हुई थी जितनी आज हो रही है।
मोहिउद्दीन ने आईएएनएस को बताया, “ऐसा लगता है कि जैसे मेरा सारा व्यापार खत्म हो गया, जबकि मेरे स्टॉक और बैंक खाते अभी भी बरकरार हैं। यह ऐसे है कि जैसे बिना एक रुपया गंवाए मैं दिवालिया हो गया हूं।”
उन्होंने कहा, “मेरे पास तेल, मसाले, चाय, दालें आदि का भरपूर स्टॉक है जो राज्य के बाहर से मंगाए गए हैं। मैं जिन सप्लायर्स से माल खरीदता हूं वे मुझे उधार भी दे देते हैं। महीने के अंत में मैं उनके साथ हिसाब-किताब निपटाता हूं। इसका मतलब है कि जब मेरी बिक्री होती है तो मैं उन्हें भुगतान कर पाता हूं।”
उन्होंने कहा, “मुझसे जो छोटे खुदरा व्यापारी माल खरीदते हैं, वे भी मुझे नकदी की कमी के कारण भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। उनके पास बैंक में रखने जितना पैसा नहीं होता। वे सामान बेचते हैं, अपना मुनाफा रखते हैं और मुझे भुगतान करते हैं। लेकिन, अब वे अपने ग्राहकों से बड़े नोट नहीं ले रहे, जिसके कारण उनका व्यापार प्रभावित हुआ है।”
वे कहते हैं, “मैं भी पुराने नोट नहीं ले सकता क्योंकि बैंक उसे स्वीकार नहीं करेगा। मेरा हर सप्ताह करीब 5 लाख का कारोबार होता था, लेकिन नोटबंदी के बाद से यह घटकर करीब 50,000 रुपये का हो गया है। इन 50,000 रुपये का मैं क्या करूं। मुझे तो अपने सप्लायर्स को 5 लाख रुपये का भुगतान करना है।”
चाहे छोटे कारोबारी हों या मध्यम कारोबारी, सबकी यही कहानी है। राज्य की गर्मियों की राजधानी श्रीनगर में सड़क किनारे के चाय वाले उच्च मूल्य के नोट स्वीकार नहीं कर रहें।
वहीं, कुछ स्थानीय रेस्तरां हालांकि पुराने नोट स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए बिल उस रकम के बराबर या उससे ज्यादा होनी चाहिए। क्योंकि उनके पास छुट्टे पैसे नहीं हैं।
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