नई दिल्ली, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)। हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के तीसरे सीजन में नामी-गिरामी और सफल कोचों ने खाक छानी। उनकी टीमें प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकीं जबकि नए विचारों और नई ऊर्जा के साथ सामने आए कोचों ने अपने टीमों को अनापेक्षित सफलता दिलाई।
एफसी गोवा और चेन्नयन एफसी को आठ टीमों की तालिका में इस साल अंतिम स्थान मिला जबकि उनके कोच बीते सीजन में काफी सफल रहे थे। एफसी पुणे एक बार फिर असफल रहा। ऐसा तब हुआ, जब उसने आईएसएल के सबसे सफल कोचों में से एक को अपने साथ जोड़ा।
जीको (एफसी गोवा), मार्को मातेराजी (चेन्नई) और एंटोनियो हाबास (पुणे) की नाकामी साबित करती है कि आईएसएल कितना विविध हो चुका है और इसमें हर साल नई कहानियां जुड़ती जा रही हैं।
जीको, मातेराजी और हाबास बीते तीन सीजन से आईएसएल के साथ हैं और नए सीजन की शुरुआत के समय इनके नामों के साथ सफल कोचों का ‘टैग’ लगा था। इन तीनों की 2016 की नाकाम यात्रा के अलग-अलग कारण हो सकते हैं लेकिन जिन क्लबों ने इन्हें अपने साथ बनाए रखा या फिर नए सिरे से इन्हे अपने साथ जोड़ा इनसे काफी अधिक उम्मीद लेकर चल रहे थे।
फुटबाल के जानकार पॉल मासेफील्ड का मानना है कि शीर्ष कोचों की नाकामी के एक नहीं बल्कि कई कारण रहे हैं। इनमें से एक बड़ा कारण यह है कि दूसरी टीमों ने इस दौरान खुद को काफी मजबूत किया। साथ ही साथ नाकाम क्लब प्रमुख खिलाड़ियों को अपनी ओर खींच नहीं सके तथा इनके मार्की खिलाड़ियों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। कम से कम गोवा और चेन्नई के बारे में तो यह कहा ही जा सकता है।
बर्मिघम सिटी एफसी के पूर्व खिलाड़ी मासेफील्ड ने कहा, “यह लीग पहले से अधिक शक्तिशाली और प्रतिस्पर्धी हो गई है।”
इसी तरह न्यूजीलैंड टीम तथा नार्थईस्ट युनाइटेड एफसी के पूर्व मुख्य कोच रिकी हेरबर्ट मानते हैं कि आईएसएल अब टैक्टिकल और रणनीतिक रूप से काफी सम्पन्न हो गया है।
रिकी ने कहा, “आईएसएल कई विभागों में लगातार उन्नति करेगा। यहां खिलाड़ियों और टीमों का स्तर लगातार सुधरेगा। कोच रणनीति के आधार पर पहले से अधिक सम्पन्न होंगे और वे हर समय एक दूसरे की काट निकालने में व्यस्त रहेंगे। यह लीग के लिए अच्छा पहलू है।”
आईएसएल में कमेंटेटर के तौर पर कार्यरत हेरबर्ट मानते हैं कि जो टीमें नाकाम रही हैं, उनकी नाकामी के पीछे सही संयोजन न बना पाना शामिल रहा है। चेन्नई इस साल एलानो ब्लूमर और स्टीवन मेंडोजा जैसे खिलाड़ी को रिटेन नहीं कर सका जबकि गोवा कीटीम लियो माउरा को भूल गई। इन कारणों से भी इन टीमों के बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
मजेदार बात यह है कि सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करने वाली चार टीमों के कोच आईएसएल के लिए नए हैं लेकिन इसके बाद भी वे सफलता का स्वाद लेने में सफल रहे।
गियानलुका जाम्ब्रोता (दिल्ली डायनामोज), जोस मोलिना (एटलेटिको दे कोलकाता), एलेक्सजेंडर गुइमाराएस (मुम्बई) और स्टीव कोपेल (केरला ब्लास्टर्स) ने कम अपेक्षाओं के बावजूद अपनी टीमों को सफलता दिलाई और इन्हें खिताब की दौड़ में बनाए रखा।
मासेफील्ड ने कहा, “जाहिर तौर पर नए विचारों और खेल की समझ ने इन टीमों की मदद की है। मैं यह भी मानता हूं कि इन टीमों को शुरुआती दौर में नाकामी मिली लेकिन बाद में ये सम्भलीं और फिर अपने लिए उपयुक्त अंक जुटाकर सेमीफाइनल में पहुंचने में सफल रहीं।”
हेरबर्ट ने दूसरी तरफ यह कहा कि जाम्ब्रोता और मोलिना को ऐसी टीमें मिलीं, जिन्होंने बीते सीजन में अच्छा प्रदर्शन किया था। ये टीमों बीते दो सीजन में सिर्फ सेमीफाइनल में हारी थीं जबकि गुइमाराएस ने इस साल मुम्बई को अगले चरण में पहुंचा दिया।
बहरहाल, आईएसएल-3 के सेमीफाइनल में मुम्बई का सामना पहले सीजन के विजेता कोलकाता से होगा जबकि दूसरे सेमीफाइनल में दिल्ली की टीम केरल के खिलाफ भिड़ेगी।
dharmpath.com dharmpath