कोलकाता, 11 दिसम्बर (आईएएनएस)। चेन्नई सिटी एफसी और चंडीगढ़ के फुटबाल क्लब-मिनर्वा अकादमी एफसी को रविवार को आई-लीग में सीधा प्रवेश दिया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) की निविदा मूल्यांकन समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया।
इस साल आई-लीग के दूसरे डिविजन तालिका में मिनर्वा डेम्पो से पीछे दूसरे स्थान पर रहा। इस क्लब का नाम मिनेर्वा अकादमी से बदलकर मिनर्वा पंजाब कर दिया गया।
इसके अलावा चेन्नई एफसी अपने घर में स्थानीय लीग में खेला है। एआईएफएफ ने गोवा के चर्चिल ब्रदर्स क्लब को आई-लीग में खेलने की अनुमति दे दी है। इस कारण इस लीग में कुल 10 टीमें हो गई हैं।
आई-लीग के 2016-17 सत्र की शुरुआत अगले साल जनवरी में होगी।
ऐसा कहा जा रहा है कि चेन्नई क्लब ने आई-लीग में सीधे प्रवेश के लिए निविदा पेश की थी लेकिन वित्तीय मानदंड पर खरा नहीं उतर पाया। इस लीग में प्रवेश के लिए क्लब के पास बैंक में 100 करोड़ रुपये की धनराशि जरूरी है।
हालांकि, क्लब को एआईएफएफ की ओर से बैंक की गारंटी एक करोड़ रुपये किए जाने के बाध आई-लीग में प्रवेश करने में आसानी हुई।
आईएएफएफ की दूरदर्शिता में कमी का हवाला देकर सालगांवकर, स्पोर्टिग क्लब दे गोवा और डेम्पो एससी ने हाल ही में आई-लीग से बाहर होने का रास्ता खोजा।
क्लबों के इस तरह से निकल जाने के कारण एआईएफएफ के पास आई-लीग में कुल सात टीमें रह गईं। इस कारण, दो साल के अंतराल के बाद चर्चिल और आईजॉल क्लब को लीग में दोबारा शीर्ष डिविजन में शामिल किया गया।
एशियाई फुटबाल परिसंघ (एएफसी) के दिशा-निर्देशों का पालन न कर पाने के कारण चर्चिल क्लब को शीर्ष डिविजन में खेलने की अनुमति नहीं दी गई थी। यह क्लब 2014 के बाद से ही आई-लीग में नहीं खेल पाया था।
इसके बाद चर्चिल क्लब ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की, जिसके तहत उसे पिछले सप्ताह राहत दी गई और अदालत ने एआईएफएफ को क्लब के निवेदन पर ध्यान देने का आदेश दिया।
गोवा के एफसी बार्डेज और पूर्वोत्तर क्षेत्र के नेरोका क्लब ने भी आई-लीग में खेलने हेतु निविदा पेश की थी लेकिन इन क्लबों की निविदा को खारिज कर दिया गया।
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