अवसंरचना क्षेत्र को ज्यादा आवंटन, कर राहत की आस

नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। अवसंरचना क्षेत्र के हितधारकों को उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के बजट आवंटन में वृद्धि तथा करों में राहत की उम्मीद है।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। अवसंरचना क्षेत्र के हितधारकों को उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 के बजट आवंटन में वृद्धि तथा करों में राहत की उम्मीद है।

डेलोइट तोचे तोहमासू इंडिया के कंसल्टिंग पार्टनर विश्वास उदगिरकर ने आईएएनएस को बताया, “पिछले कुछ सालों में सरकार ने अवसंरचना क्षेत्र के विकास की बाधाओं को दूर करने पर ध्यान दिया है। हालांकि इस क्षेत्र को अभी भी पर्याप्त निवेश नहीं मिल पाया है।”

उन्होंने कहा, “बजटीय आवंटन में वृद्धि की उम्मीद है और नोटबंदी के कारण बैंकों का पूंजीकरण हो रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि ऐसे में क्या इस क्षेत्र को आवश्यक पूंजी मुहैया कराने की कोई घोषणा होती है।”

पीडब्ल्यूसी के पार्टनर लीडर इंफ्रास्ट्रकचर मनीष अग्रवाल का कहना है अवसंरचना क्षेत्र पर सार्वजनिक खर्च में बढ़ोतरी की उम्मीद है, क्योंकि निजी निवेश की कमी के कारण यह क्षेत्र इसी पर आश्रित है।

अग्रवाल ने कहा, “बैंकिंग प्रणाली में वित्तीय तनाव इस क्षेत्र में निजी निवेश की राह की बाधा बनी हुई है। इसका हल निकालने के साथ ही केलकर समिति की सिफारिशों को लागू करना चाहिए तथा निजी-सार्वजनिक भागीदारी को तेजी से लागू करना चाहिए।”

आम बजट के साथ रेल बजट को मिलाने के बारे में अग्रवाल ने कहा कि इससे बजट में मुख्य मुद्दों पर ध्यान देने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि सड़क और रेल को ज्यादा बजट आवंटित किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार अंतदेर्शीय जलमार्ग और सागरमाला कार्यक्रम को ज्यादा बजट आवंटित करेगी।”

केपीएमजी के भारत में पार्टनर (रणनीति और अर्थशा) जयजीत भट्टाचार्य का कहना है, “पेंशन फंड और सॉवरिन फंड जैसे ग्लोबल फंड को आकर्षित कर उसे अवसंरचना विकास में लगाने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा।”

उन्होंने कहा, “अवसंरचना क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन बढ़ाने के साथ ही यह जरूरी है कि अवसंरचना सृजन के जरूरी नियामक तंत्र स्थापित किया जाए, जो निजी निवेश को अवसंरचना फंड में सक्षम बनाए जैसे राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना फंड (एनआईआईएफ)।”

इस क्षेत्र को उच्च आवंटन के अलावा कर में रियायतों की भी उम्मीद है।

कंस्ट्रकशन फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) ने कहा कि अनुमान है कि आम बजट 2017-18 में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कराधान में संतोषजनक राहत मिलेगी तथा कराधान कानून की विसंगतियों को भी दूर किया जाएगा।

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