लखनऊ, 1 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार के वर्ष 2017-18 के आम बजट को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बजट को जहां उत्कृष्ट और आम जनता का बजट बताया, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) व कांग्रेस ने इस बजट को घोर निराशाजनक करार दिया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने अपने एक बयान के माध्यम से इस बजट को किसानों, गरीबों, महिलाओं, उद्यमियों तथा युवाओं को उत्साहित करने वाला तथा राहत देने वाला बताया है।
उन्होंने कहा कि बजट में सड़क, बिजली, पानी के क्षेत्र में विकास का आधारभूत विजन है। बजट में 3 लाख तक टैक्स में छूट के साथ मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी गई है। कृषि ऋण के लिए 10 लाख करोड़ का प्रावधान और किसानों को 10 लाख तक के कर्ज के साथ डेयरी विकास के द्वारा किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाया है।
इधर, कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने बजट को निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जो बजट पेश किया है, उसमें विजन का आभाव है।
राजपूत ने कहा, “मोदी सरकार ने कहा था कि किसानों की आमदनी डबल कर देंगे। इस दिशा में बजट में कुछ नहीं कहा गया है। किसानों के लिए अलग से 500 करोड़ रुपये का फंड बनाने की बात की गई थी, वह भी झूठी साबित हुई। बजट में नोटबंदी से प्रभावित मजदूरों, किसान व बेरोजगारों के लिए कोई रोडमैप नहीं है।”
समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बजट को लेकर कहा कि केंद्र सरकार का बजट किसान, गांव, गरीब विरोधी है और उत्तर प्रदेश की जनता के साथ धोखा है। भारत कृषि प्रधान देश है, फिर भी हमेशा की तरह इस बार भी एनडीए के तीसरे बजट में कृषि को लेकर ठोस प्रस्ताव नहीं है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर चुनाव बाद बजट पेश करने का आग्रह किया था। निर्वाचन आयोग भी मुख्यमंत्री के इस सुझाव से सहमत था। 20 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश की उपेक्षा करके केंद्र सरकार ने लोकतंत्र का सम्मान नहीं किया। साथ ही निर्वाचन आयोग के सुझाव की भी अनदेखी की है। सांसद ई. अहमद का निधन हो गया, लेकिन अपनी धुन में मगन मोदी सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही।
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