बहराम कसीमी ने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “हम यमन के संघर्ष में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं और हमने यमनी लड़ाकों को कोई हथियार नहीं दिए।”
उन्होंने कहा, “इस संबंध में ईरान के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और अप्रासंगिक हैं और हम गंभीरता से उन सभी आरोपों को खारिज करते हैं।”
यमन में मार्च, 2015 में ईरान समर्थित शिया हौती समूह व यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अबदुल्ला सालेह के सहयोगी और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा समर्थित सरकारी बलों के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से आर्थिक और राजनीतिक स्थिति खराब हुई है।
हौती और सालेह के बलों ने यमन के उत्तरी क्षेत्रों के अधिकांश हिस्सों पर नियंत्रण कर रखा है और वहीं सरकारी बलों ने सऊदी नेतृत्व के सैन्य गठबंधन के साथ सात दक्षिण प्रांतों सहित बाकी पूरे देश पर साझा नियंत्रण बना रखा है।
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