वाशिंगटन, 8 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यात्रा प्रतिबंध का फैसला क्या मुस्लिम विरोधी है, यह सवाल पूछने वाली अमेरिका के संघीय न्यायाधीशों की एक पीठ के तीखे सवालों का सामना वकीलों को करना पड़ा।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अपीलीय अदालत ने मंगलवार रात इस मुद्दे पर सुनवाई की कि क्या इस प्रतिबंध पर लगाई गई रोक को हटा लिया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान पीठ के सवालों से न्याय विभाग के वकीलों के पसीने छूट गए।
फोन के जरिए हुई सुनवाई में काफी नाटकीय लम्हे आए।
ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध के आदेश को दो राज्यों और कई संगठनों ने चुनौती दी है।
ट्रंप प्रशासन ने कहा कि अदालत का राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में हस्तक्षेप अनुचित है।
इस पर न्याय विभाग के सहायक अटॉर्नी जनरल के विशेष अधिवक्ता अगस्त फ्लेंत्जे ने नौवीं ‘यूएस सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ को बताया, “यह एक पारंपरिक राष्ट्रीय सुरक्षा का फैसला है जो राजनीतिक विभागों और राष्ट्रपति के अधीन है।”
न्यायाधीशों ने फ्लेंत्जे से पूछा कि सरकार के पास इस बात का क्या प्रमाण है कि यह यात्रा प्रतिबंध जरूरी है।
न्यायाधीश मिशेल टी. फ्रीडलैंड ने पूछा कि सरकार क्या इन देशों के आतंकवाद से जुड़े होने का कोई प्रमाण दे सकती है।
न्यायाधीश रिचर्ड आर. क्लिफ्टन ने सरकार के तर्क को ‘अमूर्त’ बताते हुए कहा कि वीजा के लिए यात्रियों की जांच के नियम पहले से ही मौजूद हैं।
वाशिंगटन और मिनिसोटा का प्रतिनिधित्व कर रहे वाशिंगटन के अटॉर्नी जनरल नोआ पर्सेल ने अदालत की भूमिका का समर्थन किया।
वाशिंगटन और मिनिसोटा ने ट्रंप के आदेश को चुनौती दी हुई है।
उन्होंने कहा, “कानून संबंधी मामलों में अपनी राय रखना और इस पर नजर रखना हमेशा से न्यायालयों का अधिकार रहा है और यह कभी भी इतना महत्वपूर्ण नहीं रहा, जितना आज है।”
उन्होंने कहा, “अगर अदालत फैसला वापस ले लेती है तो इससे देश में फिर से ‘अराजकता’ फैल जाएगी।”
पर्सेल ने कहा, “ट्रंप प्रशासन यह साबित नहीं कर सकता कि अगर फैसला कायम रहता है तो उसे अपूरणीय क्षति होगी, जबकि कार्यकारी आदेश के कारण देश के लोगों को परेशानी होगी और सरकार को कर राजस्व का नुकसान होगा।”
लेकिन, न्यायाधीश क्लिफ्टन ने ट्रंप के आदेश के खिलाफ दिए गए इस तर्क पर संशय प्रकट करते हुए पूछा कि ट्रंप के आदेश से अमेरिका के कितने लोग प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह संख्या बहुत कम होगी।”
सभी तीनों न्यायाधीशों ने न्याय विभाग के वकील फ्लेंत्जे से पूछा कि क्या राष्ट्रपति सीधे तौर पर कह सकते हैं कि ‘हम किसी मुस्लिम को अमेरिका में प्रवेश करने नहीं देंगे। क्या वह ऐसा कर सकते हैं और क्या कोई इसे चुनौती दे सकता है।’
फ्लेंत्जे ने इस पर कहा, ‘आदेश में यह नहीं कहा गया है।’
लेकिन, क्लिंफ्टन ने बार बार पूछा, “हम इस सवाल का जवाब सुनना चाहते हैं।”
आखिरकार फ्लेंत्जे ने कहा कि ऐसे व्यक्ति से जुड़ा कोई अमेरिकी नागरिक इसे चुनौती दे सकता है जो अमेरिका आना चाहता हो।
पर्सेल ने इस पर कहा, “आपको यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि इससे हर मुस्लिम को नुकसान होगा। आपको केवल यह साबित करना है कि यह कार्रवाई शत्रुतापूर्ण भावना से की गई है।”
उन्होंने ट्रंप के बयानों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यात्रा प्रतिबंध के इस आदेश के मामले में भेदभाव की इच्छा के स्तब्ध करने वाले सबूत मौजूद हैं।
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