अनिल सिंह(धर्मपथ)-भोपाल के हबीबगंज रैल्वे स्टेशन पर स्थित आरक्षण कार्यालय में नयी टोकन व्यवस्था शुरू हो गयी है,लेकिन इसके साथ ही शुरू हो गयी है अधिकारियों की दूरदृष्टी की कमी के चलती अव्यवस्थायें.
10 नम्बर की खिड़की है घोर अव्यवस्था की शिकार
यह खिड़की वह खिड़की है जहाँ कई श्रेणियों के जिनमें संसद सदस्य,विधायक रेल पास धारकों के अलावा अधिमान्य पत्रकारों हेतु इस खिड़की से आरक्षण करवाने की सुविधा है.महिलाओं के लिये भी यह खिड़की अलग से आरक्षण सुविधा प्रदान कर्ती है.
टोकन सिस्टम में बुजुर्गों का ध्यान नहीं रखा गया 10 नंबर खिड़की पर बढा दबाव
सीनियर सिटीजन के लिये पहले प्रत्येक खिड़की पर व्यवस्था थी और बुजुर्गों को परेशान नहीं होना पड़ता था,नयी व्यवस्था में बुजुर्गों के लिये इसी खिड़की पर इन बुजुर्ग व्यक्तियों के लिये भी स्थान कर दिया गया.अब होता यह है की महिलाओं और बुजुर्गों की यही एक खिड़की हो जाती है जहाँ भीड़ का दबाव बढ़ जाता है एवम जब कोई अन्य सुविधाधारक इस खिड़की पर आता है और आरक्षण करवाना चाहता है तो उसे अन्य यात्रियों के जबर्जस्त विरोध का सामना कर्ण पड़ता है तथा विवाद की स्थिति बन जाती है,टोकन व्यवस्था के भली प्रकार से व्यवस्थापन के ना होने से इस एक खिड़की पर ही सैकडों लोग परेशान हैं.
रेल्वे अधिकारियों की तानाशाही और असंवेदनशीलता का परिणाम है यह व्यवस्था
भोपाल मे पदस्थ अधिकारियों की अकल का नमूना आप के सामने है ,सोचिये ये कैसे और कार्य करते होंगे ये आमजन के प्रति कितने संवेदनशील हैं आप ने देख ही लिया,इन्हे करना यह होगा की बुजुर्गो को यदि सुविधा देनी भी है तो एक खिड़की उनके लिये अलग शुरू करेन या प्रत्येक खिड़की पर उनके लिये व्यवस्था दे वर्ना यही अव्यवस्था का अलम निर्मित होता रहेगा.
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