जयपुर, 25 फरवरी (आईएएनएस)। जयुपर की एक स्थानीय अदालत ने शनिवार को कहा कि वह 2007 के अजमेर दरगाह बम विस्फोट मामले में आठ मार्च को फैसला सुना सकती है।
इस मामले पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत शनिवार को फैसला सुनाने वाली थी, लेकिन अदालत ने इसे अब आठ मार्च तक स्थगित कर दिया है।
गौरतलब है कि सूफी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 11 अक्टूबर, 2007 की शाम 6.15 बजे हुए बम विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 15 अन्य घायल हो गए थे।
इस मामले की सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह में ही पूरी हो गई थी। इस दौरान 149 प्रत्यक्षदर्शियों और 451 दस्तावेजों को अदालत के समक्ष पेश किया गया।
एनआईए के आरोपपत्र के मुताबिक, इस विस्फोट के लिए कुछ हिंदू संगठनों को जिम्मेदार ठहराया गया। आरोपपत्र में स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, चंद्रशेखर लेवे, मुकेश वासानी, भारत मोहन रातेश्वर, लोकेश शर्मा और हर्षद सोलंकी ने बम विस्फोटों की योजना बनाई थी।
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