ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका सहित परिषद के नौ सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में अपना मत दिया। वीटो अधिकार प्राप्त चीन और रूस के अलावा बोलीविया ने प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया। वहीं कजाकिस्तान, मिस्र और इथियोपिया मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे।
संयुक्त राष्ट्र में चीनी राजदूत लियू जिएयी ने मतदान के बाद परिषद से कहा कि रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के संबंध में जांच अभी चल रही है और फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने कहा, “हम किसी भी परिस्थति में किसी भी राष्ट्र, संगठन या व्यक्ति द्वारा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल का विरोध करते हैं।”
रूस के उप-राजदूत व्लादिमिर सफ्रोंकोव ने कहा कि जिनेवा में सरियाई संकट का समाधान निकालने के प्रयास के बावजूद यह मसौदा पश्चिमी देशों के सिद्धांत के आधार पर मत के लिए पेश किया गया।
उन्होंने कहा, “हम इसे विकास को अवरुद्ध करने और मौजूदा राजनीतिक एवं कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने के प्रयास के रूप में देखते हैं।”
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