श्रीलंका बाल अधिकारों के लिए दक्षिण एशियाई भागीदारों के साथ

कोलंबो, 6 मार्च (आईएएनएस)। श्रीलंका के सांसदों ने बाल अधिकारों की प्राथमिकता व रक्षा के लिए दक्षिण एशिया के अन्य देशों के सांसदों के साथ हाथ मिलाया है। संयुक्त राष्ट्र की बच्चों की संस्था यूनिसेफ ने सोमवार को यह जानकारी दी।

यूनिसेफ के अनुसार, आर्थिक वृद्धि और बच्चों के अधिकारों में सुधार के बावजूद बड़े पैमाने पर अभी भी असमानता है, जो बच्चों को गरिमा के साथ रहने से, उनकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल होने और उन्हें भविष्य के विकल्पों के चुनाव से रोक रही है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, श्रीलंका में 18 से कम उम्र के 80 लाख बच्चे हैं। यहां इलाके के सबसे अच्छे स्वास्थ्य संकेतक अस्तित्व में है। सभी को सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा व करीब 90 फीसदी जनसंख्या को साफ पीने का पानी मिल रहा है।

हालांकि, यूनिसेफ ने पाया है कि बच्चों के खिलाफ हिंसा, जिसमें घरों में शारीरिक शोषण भी शामिल है, चिंता की वजह है। अत्यंत गरीबी दर में गिरावट (साल 2002 से 2012 के बीच में 16 फीसदी) आ रही है, लेकिन बच्चों की गरीबी दर उच्च बनी हुई है।

सांसद सुदर्शनी फर्नाडोपुले ने कहा, “हालांकि हमारे संकेतक वास्तव में अच्छे हैं फिर भी हमारे पास अभी भी बाल विवाह, स्कूल छोड़ने और पलायन से प्रभावित बच्चों के मुद्दे हैं।”

उन्होंने कहा, “बच्चे हमेशा एक देश के विकास और भविष्य के आर्थिक वृद्धि के केंद्र में रहते हैं। हमें नीति सुधारों में ज्यादा निवेश करने की जरूरत है और इन असमानताओं को दूर करने के लिए बजट में आवंटन की जरूरत है, ताकि हर बच्चे खास तौर से वंचित, हाशिए पर पड़े बच्चों को उनकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर मिल सके।”

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