जकार्ता, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडोनेशिया में एक अदालत ने मंगलवार को ईश निंदा मामले में जकार्ता के ईसाई गवर्नर पर चलने वाले मुकदमे को शहर में 19 अप्रैल को होने वाले चुनाव तक के लिए टाल दिया। मुस्लिम प्रदर्शनकारी सरकार से गवर्नर के निलंबन की मांग कर रहे हैं।
आमतौर पर अहोक के नाम से मशहूर बासुकि जहजा पूरनामा पर पिछले साल सितंबर में एक प्रचार अभियान के दौरान कुरान के प्रसंगों के हवाले से इस्लाम का अपमान करने का आरोप है। अगर उन्हें दोषी पाया गया तो उन्हें पांच साल कैद की सजा होगी।
समाचार एजेंसी एफे ने मंगलवार को बताया कि मुकदमे को 20 अप्रैल तक टाल दिया गया है। इस चुनाव में जकार्ता की जनता अहोक और उनके मुस्लिम प्रतिद्वंदी अनीज बासवेदान में से किसी एक को चुनेगी।
उत्तरी जकार्ता जिला अदालत के न्यायाधीशों के पैनल ने मंगलवार को ईश निंदा मामले में मुकदमे को टालने का फैसला किया क्योंकि लोक अभियोजकों ने अभी तक सजा देने से संबंधित अनुरोध पत्र तैयार नहीं किया है।
लोक अभियोजक अली मुकारतोनो ने कहा, “हमने पूरी कोशिश की, अनुरोध पत्र तैयार करने के लिए एक सप्ताह का समय पर्याप्त नहीं है। हम तहे दिल से माफी मांगते हैं और सजा के अनुरोध पत्र को पढ़ने के लिए और समय देने का आग्रह करते हैं, लेकिन हम इसे आज नहीं पढ़ेंगे।”
उन्होंने कहा, “हम और दो सप्ताह का समय देने का आग्रह कर रहे हैं।”
दुनिया में सबसे अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले देश में हालिया महीनों में कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा चीनी मूल के ईसाई नेता अहोक द्वारा ईश निंदा करने पर बड़े पैमाने पर विरोध जताया गया है।
अदालत के सामने इस्लामिक डिफेंडर फ्रंट ने प्रदर्शन किया और गवर्नर के निलंबन और गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने हाथ में बैनर ले रखे थे जिस पर लिखा था, ‘अहोक को ईश निंदा मामले में गिरफ्तार करो..कानून की नजर में सब बराबर हैं।’
आधी सदी में जकार्ता के पहले गैर-मुस्लिम गवर्नर अहोक मुस्लिमों का अपमान करने के मामले में माफी मांग चुके हैं। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई गई उनकी टिप्पणी के साथ छेड़छाड़ हुई है।
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