मणि के इस्तीफे की मांग पर दूसरे दिन भी केरल विधानसभा बाधित

तिरुवनंतपुरम, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल के बिजली मंत्री एम.एम. मणि की महिला बागवानी श्रमिकों पर की गई टिप्पणी को लेकर राज्य विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने बुधवार को भी हंगामा किया और मणि के इस्तीफे की मांग की।

कांग्रेस विधायक वी.डी. सतीशन ने कहा कि पिनरई विजयन सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी की भावना खत्म हो गई है। हर मुद्दे पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की अलग राय से यह स्पष्ट है।

सतीशन ने कहा, “विजयन और मणि एक बात कहते हैं, जबकि भाकपा के मंत्री कुछ और कहते हैं। भाकपा के एक मंत्री की अध्यक्षता वाले राजस्व विभाग द्वारा मुन्नार में कब्जाई गई जमीन छुड़ाने की कार्रवाई से यह स्पष्ट है। बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मणि ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मुन्नार की बागवानी श्रमिकों के खिलाफ अपशब्द कहे।”

सतीशन ने कहा, “मुन्नार में पुलिस और माकपा पेम्बुलई ओरुमई (महिला संगठन) को आंदोलन खत्म करने के लिए धमका रहे हैं। यह माकपा जैसी पार्टी के लिए अनुचित है, जिसने खुद भी कई हड़तालें की हैं।”

टीवी चैनलों पर शनिवार रात मणि का एक भाषण प्रसारित किया गया था, जिसमें वह 2015 में मुन्नार में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं बागवानी श्रमिकों के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे थे।

जिसके बाद चार महिला बागवानी श्रमिकों ने मणि से माफी और इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया।

कांग्रेस और भाजपा दोनों इन महिलाओं के समर्थन में हैं।

वहीं, विजयन ने कांग्रेस के विरोध को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी एक ऐसे मुद्दे को उठा रही है, जो कोई मुद्दा ही नहीं है।

विजयन ने कहा, “ऐसा लगता है कि आपके पास मुद्दों की कमी है, इसलिए आप बार-बार महिला संगठन की हड़ताल का मुद्दा उठा रहे हैं। संगठन की अध्यक्ष ने भी इस हड़ताल को अस्वीकार कर दिया है, जबकि आप बार-बार इसे उठा रहे हैं। यह स्पष्ट होने के बाद कि मीडिया ने मणि के भाषण का संपादित अंश प्रसारित किया है, मुन्नार के स्थानीय लोग भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे। मणि ने कुछ गलत नहीं किया।”

विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा कि विजयन सरकार में चीजें सही नहीं हैं, जहां भाकपा विजयन के शासन से जुड़े हर दावे का खंडन कर रही है।

चेन्निथला के भाषण के बाद पूरे विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा बंद न होने के कारण अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।

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