चोट से उबर नई शुरुआत करना चाहते हैं तेज गेंदबाज वरुण एरॉन

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। एक समय उमेश यादव के साथ भारतीय क्रिकेट के भविष्य के तौर पर देखे जा रहे तेज गेंदबाज वरुण एरॉन का करियर लगातार कई चोटों के चलते जैसे थम सा गया है, वहीं उमेश खेल के तीनों प्रारूपों में अपनी जगह सुनिश्चित कर ले गए।

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। एक समय उमेश यादव के साथ भारतीय क्रिकेट के भविष्य के तौर पर देखे जा रहे तेज गेंदबाज वरुण एरॉन का करियर लगातार कई चोटों के चलते जैसे थम सा गया है, वहीं उमेश खेल के तीनों प्रारूपों में अपनी जगह सुनिश्चित कर ले गए।

लगभग एक साथ एकदिवसीय में पदार्पण करने के बाद उमेश ने अपनी जगह पक्की कर ली लेकिन, वरुण चोटों में उलझ कर रह गए।

वरुण ने 23 अक्टूबर 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में पदार्पण किया था, लेकिन जल्द ही वह चोटिल हो टीम से बाहर हो गए। 25 जनवरी 2014 को वरुण ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की, लेकिन एकबार फिर पीठ की समस्या ने उन्हें मैदान से दूर कर दिया।

वरुण ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “मुझे गलत समय पर चोटें लगीं और यह मेरे लिए काफी नुकसानदायक रहा। उमेश और मैं एक साथ टीम में आए थे, लेकिन उमेश टीम के साथ मुझसे ज्यादा समय बिता चुके हैं। मैं अभी 27 साल का हूं और मेरे अंदर काफी क्रिकेट बाकी है। हम दोनों काफी अच्छे दोस्त हैं। मैं उमेश के लिए खुश हूं।”

उन्होंने कहा, “जब आप फॉर्म में होते हैं और आपको चोट लगती है, तो इससे आपको कोई फायदा नहीं होता, इससे सिर्फ आपकी लय बिगड़ जाती है। पिछले सत्र की शुरुआत मैंने अच्छी की थी, लेकिन एक बार फिर चोटिल हो गया।”

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि यह खेल का हिस्सा है। मैं एक तेज गेंदबाज हूं और हमारे साथ इस तरह की समस्याएं होती रहती हैं।”

वरुण ने कहा कि वह अपनी फिटनेस पर काम कर रहे हैं और बीते कुछ वर्षो में उन्हें चोटें लगना भी कम हुई हैं।

वरुण ने कहा, “मैं बीते कुछ वर्षो से काफी मेहनत कर रहा हूं और मेरी चोटें भी कम हुई हैं। एड़ी में लगी चोट पिछले दो साल में पहली चोट थी। इसलिए मैं मान चुका हूं कि चोटें लगती रहती हैं। लेकिन कुछ चोटें होती हैं, जिनको आप नियंत्रित कर लेते हैं और कुछ होती हैं, जिन पर आपका नियंत्रण नहीं होता। इसलिए मैं उन चोटों को नियंत्रित करने की कोशिश करता हूं जो मेरे नियंत्रण में हैं।”

वरुण के पास 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है, लेकिन वह काफी मंहगे साबित होते हैं। जब इसके बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मैं जब भी क्रिकेट खेलता हूं तो मेरी सोच सिर्फ विकेट लेने की होती है, कई बार ऐसा होता है तो कई बार ऐसा नहीं हो पाता।”

उन्होंने कहा, “मैं इसी मानसिकता के साथ राष्ट्रीय टीम में खेला हूं। इस रणनीति और मानसिकता के साथ हमेशा रन देने का जोखिम होता है।”

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