काबुल, 8 जून (आईएएनएस)। अफगानिस्तान सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के नौ महीने बाद पूर्व विद्रोही समूह हिज्ब-ए-इस्लामी ने देश के संसदीय तथा राष्ट्रपति चुनावों में हिस्सा लेने का गुरुवार को ऐलान किया।
समाचार एजेंसी एफे न्यूज की रपट के मुताबिक, लगभग एक महीने पहले अफगानिस्तान लौटे हिज्ब-ए-इस्लामी के नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार, जिन्हें ‘काबुल का कसाई’ भी कहा जाता है, ने एक प्रेस वार्ता में कहा, “हमने इन चुनावों में हिस्सा लेने का फैसला किया है।”
90 के दशक में गृहयुद्ध के दौरान काबुल पर उनके आदेश पर बमबारी हुई थी। उस दौरान आधिकारिक रूप से मौतों का आंकड़ा 50 हजार बताया गया था। राजधानी काबुल मलबे में बदल गई थी।
सन् 1990 में अफगानिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हिकमतयार ने कहा कि उनकी पार्टी के लिए साल 2019 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने से बेहतर किसी सही उम्मीदवार का समर्थन करना होगा, हालांकि हमें अपने नामित उम्मीदवार की जीत का सौ फीसदी भरोसा है।
उन्होंने कहा, “हमारा सोचना है कि अगर हम चुनाव जीतते हैं, तो क्षेत्र तथा दुनिया में अभी भी कुछ ताकतें हैं, जो हमें बर्दाश्त नहीं कर सकती हैं और हम नहीं चाहते हैं कि हमारी सत्ता के लिए हमारे देश का लहू बहे।”
उन्होंने राष्ट्रपति, संसदीय तथा स्थानीय चुनावों को अलग-अलग कराने में होने वाले भारी खर्च पर गहरी चिंता जताई।
हिकमतयार ने कहा कि किसी भी समूह के पास ताकत से सरकार बदलने का अधिकार नहीं है और उनकी पार्टी अशरफ गनी के नेतृत्व वाली सरकार को उखाड़ फेंकने की किसी को मंजूरी नहीं देगी।
संसदीय चुनाव दो साल पहले हो जाना चाहिए था, लेकिन हिंसा, चुनाव में होने वाले भारी खर्च तथा निर्वाचन आयोग के सुधार में होने वाले विलंब के कारण उसे बार-बार टालना पड़ा।
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