मप्र के गृहमंत्री ने अपने ही गोल पोस्ट में गेंद डाली!

भोपाल, 8 जून (आईएएनएस)। कई बार हॉकी और फुटबाल में खिलाड़ी गलती से अपने ही गोल पोस्ट में गेंद डालकर टीम को मुश्किल में डाल देते हैं, या यूं कहें कि हार की नौबत तक ला देते हैं। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी कुछ ऐसा ही किया है।

भोपाल, 8 जून (आईएएनएस)। कई बार हॉकी और फुटबाल में खिलाड़ी गलती से अपने ही गोल पोस्ट में गेंद डालकर टीम को मुश्किल में डाल देते हैं, या यूं कहें कि हार की नौबत तक ला देते हैं। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी कुछ ऐसा ही किया है।

राज्य में एक जून से जारी किसान आंदोलन के दौरान मंगलवार को मंदसौर में पुलिस गोलीबारी में पांच किसान मारे गए। इस घटना में सरकार लगातार पुलिस का बचाव करती रही, गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने पुलिस की ओर से गोली चलने से साफ इंकार कर दिया था। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यहां तक कह दिया था कि किसानों के आंदोलन में असामाजिक तत्व घुस आए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर भी हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।

घटना के दो दिन गुजरते ही सरकार का रुख बदल गया है, क्योंकि किसानों में सरकार के इस बयान से खासा नाराजगी है कि गोली पुलिस ने नहीं चलाई। मंदसौर व पिपलिया मंडी के पीड़ित लगातार यही कह रहे थे कि गोली पुलिस व सीआरपीएफ ने चलाई है।

किसानों की बात पर गुरुवार को गृहमंत्री सिंह ने मुहर लगा दी। गृहमंत्री ने कहा कि मंदसौर में किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई है। उन्होंने माना कि यह प्रशासन की असफलता है, इसीलिए जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक का तबादला किया गया है। इससे पहले तत्कालीन जिलाधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने भी कहा था कि पुलिस ने गोली नहीं चलाई है।

गृहमंत्री की तरफ से पुलिस गोलीबारी की बात स्वीकारने पर पार्टी महासचिव और राज्य के पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में गृहमंत्री के बयान पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा, “यह बयान बहुत आपत्तिजनक है। मैं मानता हूं कि उन्हें इस तरह के बयान से बचना चाहिए था।”

मुख्यमंत्री ने मंदसौर घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। वह जांच अभी शुरू भी नहीं हुई और गृहमंत्री ने प्रारंभिक जांच का हवाला देते हुए स्वीकार लिया कि किसानों की मौत पुलिस की गोली से हुई है। इसके अलावा मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की सहायता राशि और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का सरकार ने वादा किया है।

गृहमंत्री के बयान से कांग्रेस को हमलावर होने का मौका मिल गया है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा, “इससे अधिक शर्मनाक नहीं हो सकता कि प्रदेश का गृहमंत्री कहे कि किसानों पर गोलीचालन के बारे में अफसरों ने उन्हें गलत जानकारी दी थी। यह हालत उस प्रदेश की है, जिसे मुख्यमंत्री देश में नहीं दुनिया में नंबर वन होने का दावा करते हैं, जबकि प्रदेश का मंत्रिमंडल राजकाज चलाने में अक्षम साबित हो गया है।”

सिंह ने कहा, “मंदसौर की घटना के बाद भाजपा सरकार की आत्ममुग्धता की कलई खुल गई है। गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने गोलीबारी की घटना के बाद मात्र तीन दिन में तीन अलग-अलग बयान दिए। इतना महत्वपूर्ण महकमा और कानून-व्यवस्था देखने वाला मंत्री यह कहे कि उसे गलत जानकारी दी गई, कुशासन की पराकाष्ठा है। हद तो यह है कि अपनी राजनीतिक चूक का ठीकरा अफसरों के सिर फोड़ रहे हैं।”

अब हर तरफ सवाल उठ रहा है कि सरकार अपनी पुलिस का बचाव कैसे करेगी, क्योंकि विभाग के मंत्री ने ही पुलिस को संदिग्ध बना दिया है। इतना ही नहीं इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया था। मंत्री की स्वीकारोक्ति से भारतीय किसान मजदूर संघ के इस आरोप को बल मिलता है कि आंदोलन को कमजोर करने पुलिस ने ही आगजनी और गोली चलाई थी।

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