नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से ट्रक बेड़ों के मालिकों का 24-36 घंटों का ट्रकों का सफर का समय बचेगा, इसके अलावा प्रत्येक ट्रिप पर चेक पोस्ट पर भुगतान न करने से 7,500 रुपये की बचत होगी, क्योंकि ये चेक पोस्ट अब खत्म हो चुके हैं।
नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से ट्रक बेड़ों के मालिकों का 24-36 घंटों का ट्रकों का सफर का समय बचेगा, इसके अलावा प्रत्येक ट्रिप पर चेक पोस्ट पर भुगतान न करने से 7,500 रुपये की बचत होगी, क्योंकि ये चेक पोस्ट अब खत्म हो चुके हैं।
उद्योग संगठन एसोचैम ने सोमवार को यह जानकारी दी। इसमें बताया गया, “हमारे त्वरित जांच से पता चला है कि एक ट्रक प्रतिदिन औसतन 10-12 घंटे चलता है और दिल्ली से चेन्नई की दूरी करीब 3 दिनों में तय कर सकता है। लेकिन विभिन्न राज्यों के चेक पोस्ट पर वैट, ऑक्टराई और अन्य स्थानीय कर देने के लिए रुकने के कारण यह दूरी तय करने में 5 से 6 दिन लग जाते हैं।”
इसमें कहा गया कि इन चेक पोस्टों के हटने के बाद कम से कम 24-36 घंटों की बचत होगी। ट्रांसपोर्ट मालिकों से बातचीत के बाद एसोचैम ने कहा, “भ्रष्टाचार के कारण हरेक चेक पोस्ट पर अतिरिक्त रकम खर्च होता है जो दिल्ली से चेन्नई के बीच औसतन 5,000 से 7,500 रुपये है। इनके हटने से इस रकम की भी बचत होगी।”
एसोचैम ने कहा कि ट्रक मालिकों ने बताया कि दिल्ली-कोलकाता, मुंबई-जयपुर, अहमदाबाद-दिल्ली और बेंगलुरू-दिल्ली आदि रूप पर ड्राइवरों और सहायकों को वे अतिरिक्त 10,000 रुपये जेबखर्च के रूप में देते है, जो उनसे कई स्थानों पर जबरदस्ती रोककर वसूली जाती है।
एसोचैम ने उम्मीद व्यक्त की कि इस दिशा में भी आगे सुधार होगा, खासतौर से अवसंरचना में प्रगति होने के बाद।
एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत ने कहा, “उदाहरण के लिए शहरों में नो एंट्री से बाईपास बनाकर राहत दी जा सकती है। इससे ट्रकें बिना किसी बाधा के आ-जा सकेंगी।”
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