शंकराचार्य का सांई बाबा विवाद-हिन्दुओं को बांटने की राजनीतिक साजिश

अनिल सिंह

imagesशंकराचार्य ने सांई बाबा का मामला क्या उठाया जैसे आग लग गयी,किसी ने यह नहीं सोचा की आखिर यह क्यों,शंकराचार्य का कार्य क्या है,सांई बाबा क्या थे,क्यों यह बयान आया,उमा भारती को सच कहने पर भी विरोध क्यों सहना पड़ा आखिर वे पीछे क्यों हातीं और इस बयान के पीछे मकसद क्या है.

दरअसल कांग्रेसी रणनीतिकारों को जिनमें शंकराचार्य के अनुयायी शामिल हैं को भाजपा की यह विजय पची नहीं,उन्होनें अध्ययन किया तो पाया की हिन्दू वोट इस दफे मोदी को देखते हुए राष्ट्रभक्ति और विकास के विचार को दृष्टिगत रखते हुए भाजपा को मिला और पूर्ण बहुमत की तरफ ले गया.वोटों के ध्रुवीकरण की राजनीति पर राष्ट्रवादी विचार भारी पड़े,यह कांग्रेसी रणनीतिकार समझ नहीं पाये थे.

indexशंकराचार्य शुरू से ही कांग्रेसी विचारों के और उनके नेताओं के करीबी माने जाते हैं,उन पर यह आरोप हमेशा से लगते आये हैं,कभी पत्रकार को मारना,कभी भक्तों को धकियाना ये उन्हें सुर्खियों में रखता रहा है.राजनीति के खिलाड़ियों ने सांई बाबा से भी आयेज सोच नागाओं को भड़काने का पूरा मसौदा तैयार किया है,नागा साधु अपना पिण्डदान जीते जी कर देते हैं इनका जीवन सनातन की रक्षा हेतु समर्पित होता है तथा यह फ़ौज जिसकी संख्या आज लगभग 2 लाख है और इनके परम गुरु शंकराचार्य माने जाते हैं,सोचिये राजनीति ना समझने वाले वे नागा यदि तपोस्थालियों से उतर आये तो समाज की स्थिति कितनी भयावह होगी.

यह पूरा विवाद जो विवाद का विषय है ही नहीं सिर्फ हिन्दुओं को आपस में लड़ने-झगड़ने या एक दूसरे से दूर करने की साजिश है,सनातन को सदियों से इसी तरह जाति,वर्ग,समुदाय के नाम पर तोडा जाता रहा और यह प्रयास भी उसी कड़ी का एक अंग है,यदि अभी भी हमारे सम्माज को यह नहीं समझाया गया तो वह कुत्सित राजनीति का शिकार हो मानसिक रूप से बांट जायेगा और नुकसान अंततः सनातन का ही होगा.

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