कोलकाता, 25 नवंबर (आईएएनएस)। नागरिकता अधिनियम में संशोधन कर बांग्लादेशी मुस्लिमों और हिदुओं के बीच अंतर पैदा करने की कोशिश के आरोपों को दरकिनार करते हुए असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को कहा कि जो भी धार्मिक उत्पीड़न से परेशान होकर यहां आए हैं, उनकी रक्षा की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय नागरिक पंजिका (एनआरसी) को अद्यतन करने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का पालन करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2016 का एनआरसी को अद्यतन करने से कोई संबंध नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी सरकार बांग्लादेशी हिंदुओं और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बीच अंतर का समर्थन करती है? उन्होंने कहा, “छह धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर भारत आए हैं। यह एक विशेष मामले से संबंधित मामला है। यह अंतर का प्रश्न नहीं है, बल्कि उनलोगों का प्रश्न है, जो धार्मिक उत्पीड़न के बाद यहां आए हैं। उनकी रक्षा की जाएगी और यह भारत सरकार द्वारा अपनाई गई सैद्धांतिक रेखा है।”
एनआरसी अद्यतन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई दोबारा 29 नवंबर को होगी और उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि राज्य सरकार एनआरसी अद्यतन की तैयारी की तयसीमा दिसंबर से बढ़ा सकती है।
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