भोपाल में साझी विरासत पर 3 दिवसीय मंथन रविवार से

भोपाल, 25 नवंबर (आईएएनएस)। देश में बीते कुछ सालों में साझी विरासत और मूल्यों पर गहराए गंभीर संकट पर चिंतन और मंथन करने के लिए देश भर के बुद्धिजीवी मध्यप्रदेश की राजधानी में 26 नवंबर से शुरू हो रहे ‘भोपाल विज्ञान उत्सव’ में हिस्सा लेने जुट रहे हैं।

भोपाल उत्सव से जुड़े वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. सब्यसाची चटर्जी, आयोजन समिति के सलाहकार मंडल के सदस्य व वरिष्ठ कवि राजेश जोशी, जन स्वास्थ्य आंदोलन के डॉ. अमित सेनगुप्ता, ऑल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क के महासचिव टी. रमेश ने शनिवार को यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में आयोजन की विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि देश और प्रदेश के विभिन्न जन संगठनों, सांस्कृतिक और विज्ञान आंदोलनों से जुड़े साहित्यकार, कलाकार, रंगकर्मी, वैज्ञानिक एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लोकतांत्रिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच और असहमति के अधिकार के पक्ष में तीन दिवसीय भोपाल उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 26 से 28 नवंबर तक चलेगा।

उन्होंने आगे बताया कि उत्सव में देश की साझी विरासत, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विविधताओं और विवेक की महत्ता पर आधारित विभिन्न संगोष्ठियों और व्याख्यानों, अंधविश्वासों और चमत्कारों की ताíकक व्याख्या, वैकल्पिक सिनेमा का प्रदर्शन, कविता-पाठ, नाटक और जन गीतों की प्रस्तुतियों के अलावा पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने बताया, “लोकतंत्र, विवेक और विविधता हमारे देश की ऐसी विशेषताएं हैं, जो दुनिया में हमारे देश को एक अलग स्थान देते हैं। हमारे संवैधानिक मूल्य जो हमको असहमति या प्रतिरोध का अधिकार भी दिलाते हैं वे भी अभूतपूर्व हैं। लेकिन विगत कुछ सालों से हमारी साझी विरासत और मूल्यों के सामने गंभीर चुनौतियां पेश की जा रही हैं। हमारे देश के लगभग हर हिस्से में असहिष्णुता और हिसा का लगातार बढ़ते जाना हम सभी को चितित करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “विकास के नाम पर आज छद्म राष्ट्रवाद और तमाम ऐसे भावनात्मक मुद्दों को उछाला जा रहा है, जिनका विकास से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।”

उन्होंने कहा कि भारत को आज ऐसे राष्ट्रवाद की जरूरत है, जो सभी के विश्वासों, जीवनशैलियों और खानपान का सम्मान करता हो और जिसमें प्रतिरोध और आलोचना के स्वरों को राष्ट्रविरोधी कह कर दबाया न जाता हो।

उन्होंने बताया कि तीन दिन तक चलने वाला यह उत्सव लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा, विविधता और विवेक को उभारने एवं वैज्ञानिक सोच और प्रतिरोध के स्वरों को नई आवाज देने पर केंद्रित है।

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