भारत की पहली महिला फोटोजर्नलिस्ट पर गूगल का डूडल

मुंबई, 9 दिसम्बर (आईएएनएस)। गूगल ने

शनिवार को भारत की पहली महिला फोटा जर्नलिस्ट होमी व्यारावाला की 104वीं जयंती पर उनका डूडल बनाकर उन्हें सम्मानित किया है।

‘फर्स्ट लेडी ऑफ द लेंस’ के रूप में सम्मानित व्यारावाला को भारत के स्वतंत्रता संग्राम, दलाई लामा, महात्मा गांधी व मार्टिन लूथर किंग जूनियर के बेहतरीन फोटो खींचने के लिए जाना जाता है।

इस ब्लैक एंड व्हाइट डूडल को मुंबई के कलाकार समीर कुलावूर ने बनाया है, जिसमें उन्हें उनके पुराने कैमरे के साथ मुस्कुराते हुए फोटो खींचते हुए दिखाया गया है। डूडल में उनके पीछे उनके द्वारा खींचे जाने वाले विषय को भी दिखाया गया है।

होमी का जन्म आज(नौ दिसंबर) के ही दिन वर्ष 1913 में पारसी दंपति दोसाभाई और सूनाबाई हाथीराम के घर गुजरात के नवसारी में हुआ था।

होमाई को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से हाथीराम दंपति उन्हें लेकर बंबई(अब मुंबई) आ गए और बेहतर स्कूल में उसका दाखिला कराया, जहां वह 36 विद्यार्थियों में से 10वीं की परीक्षा पास करने वाली केवल एकमात्र लड़की थीं।

होमी ने तमाम दिक्कतों के बावजूद बंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र से स्नातक करने के बाद सेंट जेवियर कॉलेज में दाखिला लिया।

उनके पिता थियेटर कंपनी के साथ एक जगह से दूसरी जगह की यात्रा करते थे, इसलिए उनका अधिकतर बचपन यात्रा में बीता। होमाई ने बाद में विख्यात जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में दाखिला ले लिया, जिसके बाद उन्होंने वर्ष 1930 के मध्य में अपना फोटोग्राफी करियर शुरू किया और इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया पत्रिका के साथ अपने करियर की शुरुआत की।

इस बीच उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया के अकाउंटेंट सह छायाकार जे. व्यारावाला से शादी की और कुछ दिनों बाद उनकी फोटो उनके नाम के साथ छपी, वह भी उस दौर में जब महिला फोटोग्राफर बनना एक असंभव-सा कार्य था। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उनके ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी के लिए पहचान मिलनी शुरू हो गई।

वर्ष 1942 में उनके दिल्ली आने व ब्रिटिश सूचना सेवा(बीआईएस) में शामिल होने के बाद उनकी ख्याति और बढ़ गई। जिसके बाद वहां उन्होंने उस ऐतिहासिक क्षण की फोटो ली, जिसमें कांग्रेस के सदस्य भारत के विभाजन के लिए मतदान करने के लिए बैठक कर रहे थे।

उन्होंने गांधी के दाह-संस्कार से लेकर दलाई लामा के भारत में प्रवेश करने की भी फोटो खींची।

उन्होंने अपने कैमरे में उस समय के विख्यात लोगों जैसे पंडित जवाहर लाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना, खान अब्दुल गफ्फार खान, माउंटबेंटन दंपति, इंदिरा गांधी व उनके पति फिरोज गांधी, अमेरिका की प्रथम महिला जेकलीन केनेडी, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय समेत कई अन्य को अपने कैमरे में कैद किया।

वर्ष 1973 में अपने पति के निधन के बाद उन्होंने पूरी तरह से फोटोग्राफी छोड़ दी और मुंबई से हमेशा के लिए बड़ौदा चली गईं, जिसके बाद वह एक दशक तक राजस्थान में भी रही, जहां बिट्स पिलानी में उनके एक मात्र संतान फारूख शिक्षक थे। वर्ष 1982 में कैंसर से फारूक की मौत हो गई।

पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित होमी व्यारावाला का निधन 99 वर्ष की अवस्था में 15 जनवरी, 2012 को हुआ।

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