नई दिल्ली, 11 दिसंबर (आईएएनएस)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने सोमवार को सरकार से निजी अस्पतालों में आपातकालीन मामलों में इलाज की लागत में सब्सिडी देने और पुनर्भुगतान के लिए एक मजबूत तंत्र सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।
आईएमए के अध्यक्ष के.के. अग्रवाल ने मीडिया को बताया, “(मेडिकल प्रबंधन) आपातकालीन मामलों की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। सरकार को निजी क्षेत्र में सभी तरह की आपात स्थितियों पर खर्च में सब्सिडी देनी चाहिए और पुनर्भुगतान के लिए एक तंत्र तैयार करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर ‘आईएमए मेडिकल र्रिडेसल कमीशन’ नाम के एक नए निकाय का गठन किया जाएगा, जो स्वास्थ्य देखभाल के सामाजिक, वित्तीय, और गुणवत्ता के ऑडिट में संलग्न होगा।
अग्रवाल ने कहा, “आयोग में एक आम व्यक्ति, एक आईएमए कार्यालय पदाधिकारी, एक पूर्व राज्य चिकित्सा परिषद का प्रतिनिधि और दो विषय विशेषज्ञ होंगे।”
उन्होंने कहा कि आयोग समयबद्ध तरीके से हर शिकायत पर विचार करेगा।
आईएमए के अधिकारी ने कहा, “राज्य आयोग की अपील पर आईएमए-मुख्यालय मेडिकल रिवरेशन कमीशन द्वारा सुनवाई की जाएगी। साथ ही कमीशन के पास स्वयं मामलों में संज्ञान लेने की शक्ति होगी।”
भारत के सभी डॉक्टरों के संघ आईएमए ने निजी अस्पतालों के प्रबंधन से मांग की है कि वे डॉक्टरों को लक्ष्य के साथ काम करने के लिए और अपनी पसंद के हिसाब से दवाएं लिखने और उपकरण मंगाने के लिए मजबूर न करें।
अग्रवाल ने कहा, “सलाहकारों को रोगियों की क्षमता के मुताबिक उपकरणों का सुझाव देना चाहिए, न कि प्रबंधन के अनुसार।”
अग्रवाल गुरुग्राम के फोर्टिस और उत्तरी दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के खिलाफ चिकित्सा में लापरवाही के मामले पर बोल रहे थे।
चिकित्सक-मरीज के बीच भरोसे में कमी आने का जिक्र करते हुए आईएमए प्रमुख ने कहा कि लोगों ने चिकित्सा पेशेवरों को संदेह की नजर से देखना शुरू कर दिया है।
मैक्स अस्पताल में 30 नवंबर को डॉक्टरों द्वारा समय से पहले जन्मे नवजात शिशु को गलत तरीके से मृत घोषित किए जाने की घटना का जिक्र करते हुए अग्रवाल ने मैक्स का बचाव करते हुए कहा, “त्रुटियां दुर्घटनावश होती हैं, जानबूझकर नहीं।”
उन्होंने कहा, “चिकित्सकीय पेशेवरों के लिए आत्मनिरीक्षण करने का भी यही समय है। आज से, देश के सभी डॉक्टरों को पर्चे पर सस्ती दवाएं लिखने का विकल्प चुनना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि आईएमए सिफारिश करता है कि सभी डॉक्टरों को आवश्यक दवाइयों की राष्ट्रीय सूची बनानी चाहिए और जन औषधि केंद्रों को बढ़ावा देना चाहिए।
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