नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को कहा कि सरकार श्रम कानूनों में सुधार और राज्यों के साथ मिलकर कारोबार अनुकूल वातावरण बनाने के लिए काम कर रही है।
बजट सत्र की शुरुआत में संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद भारत की वृद्धि दर प्रभावशाली रही, क्योंकि सरकार ने वित्तीय संस्थानों की मजबूती को अपनी प्राथमिकता में रखा।
उन्होंने कहा, “2016-2017 की पहली तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था जीडीपी वृद्धि में एक अस्थायी मंदी की गवाह रही। जबकि 2017-18 की दूसरी तिमाही में यह चलन बिल्कुल उलट हो गया।”
राष्ट्रपति ने कहा, “पिछले साढ़े तीन सालों में मुद्रास्फीति की दर के साथ-साथ सरकार की वित्तीय और चालू खाता घाटे में औसतन गिरावट देखी गई।”
उन्होंने कहा कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन 40 फीसदी तक बढ़ गया है और श्रम कानूनों के अनुपालन के लिए रजिस्टरों की संख्या 56 से घटकर पांच हो गई है।
उन्होंने कहा, “हमारे श्रमिक राष्ट्र निर्माण में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। उनके हितों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील मेरी सरकार श्रम कानूनों में सुधार के लिए लगातार कार्य कर रही है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि आधार ने बिचौलियों को हटाकर गरीबों के अधिकारों को सुरक्षित करने में मदद की है और 400 से अधिक योजनाओं में डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को अपनाया गया है।
उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर को आजादी के बाद से अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार करार दिया और कहा कि इसका मकसद आर्थिक समेकन प्राप्त करना था।
कोविंद ने कहा कि उपभोक्ता को वस्तु और सेवाओं की कम कीमतों के लाभ मिले, इसलिए राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण का गठन किया गया है, जो इस पर नजर रखेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार बैंकिंग प्रणाली को पुनर्जीवित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजी डालने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी है। इसे समाप्त करने के लिए पिछले एक साल में साढ़े तीन लाख से ज्यादा फर्जी कंपनियों के पंजीकरण रद्द किए गए हैं।”
उन्होंने कहा कि ई-बाजार स्थानों की रचना की गई है और सार्वजनिक खरीदारी में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
व्यापार को आसान बनाने की सूची में 142 से 100वीं रैंकिग प्राप्त करने पर उन्होंने कहा कि इसने वैश्विक बाजार में भारत की विश्वसनीयता को बेहतर बनाया है।
उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक लोकतंत्र को मजबूती देने के लिए सरकार ने योजनाएं लागू की हैं। जन धन योजना के तहत गरीबों के लिए अभी तक 31 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत अब तक करीब 10 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी गई और चार लाख करोड़ रुपये के ऋण को वितरित किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सभी देशों में युवा है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को स्व रोजगार देने के लिए स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन जैसे कार्यक्रम लागू कर रही है।
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