भारतीय कॉटन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सबसे सस्ता : सीएआई प्रेसिडेंट

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। घरेलू बाजार में फिर रूई में लगातार तेजी का रुख देखा जा रहा है। हालिया तेजी विदेशी संकेतों के साथ-साथ देसी कारकों से ज्यादा प्रेरित है, जिनमें घरेलू मुद्रा में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी प्रमुख है। भारतीय रूई का दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सबसे कम है और रुपये में कमजोरी से रूई की विदेशी मांग में इजाफा हुआ है।

नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। घरेलू बाजार में फिर रूई में लगातार तेजी का रुख देखा जा रहा है। हालिया तेजी विदेशी संकेतों के साथ-साथ देसी कारकों से ज्यादा प्रेरित है, जिनमें घरेलू मुद्रा में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी प्रमुख है। भारतीय रूई का दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सबसे कम है और रुपये में कमजोरी से रूई की विदेशी मांग में इजाफा हुआ है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के प्रेसिडेंट अतुल गंतरा के मुताबिक देसी मुद्रा में अगर और गिरावट आती है तो भारत से रूई का निर्यात बढ़ेगा और आयात में कमी आएगी।

मुंबई से टेलीफोन पर बातचीत में अतुल ने आईएएनएस को बताया कि इस समय भारतीय रूई का दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सबसे कम है, लिहाजा, विदेशी मांग बढ़ गई है, जिससे आगे सुस्ती की संभावना कम है। सीआईए प्रेसिडेंट ने बताया, “चालू कॉटन फसल वर्ष 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत ने अब तक 30 लाख गांठ (170 किलोग्राम प्रति गांठ) रूई का निर्यात किया है, जबकि निर्यात के कुल 35 लाख गांठ के सौदे हो चुके हैं।”

गंतरा ने कहा कि निर्यात मांग बढ़ने से रूई के भाव में तेजी आगे भी बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि गुजरात शंकर-6 रूई की वेरायटी का जो भाव अभी 41,000-42,000 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम प्रति कैंडी) चल रहा है वह आगे 44,000 रुपये प्रति कैंडी जा सकता है।

अतुल गंतरा ने कहा, “हमारे परंपरागत खरीदार बांग्लादेश, पाकिस्तान, वियतनाम और तुर्की की ओर से लगातार रूई की मांग बनी हुई है और आगे मांग में इजाफा होने की संभावना है।”

सीआईए के पिछले महीने के अनुमान के मुताबिक देश में 367 लाख गांठ रूई का उत्पादन होगा जबकि निर्यात 55 लाख गांठ होगा। गंतरा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उत्पादन का अनुमान इस महीने की बैठक में कम होने की संभावना है क्योंकि महाराष्ट्र और तेलंगाना में कपास की फसल को कीट से काफी नुकसान हुआ है जिससे उत्पादन में कमी आई है।

उन्होंने कहा कि उत्पादन अनुमान में सात लाख गांठ की कटौती की जा सकती है और इस तरह कुल उत्पादन 360 लाख गांठ रहने की संभावना है। गंतरा के मुताबिक 55 लाख गांठ निर्यात का आंकड़ा आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। संभव है कि भारत इससे भी ज्यादा रूई का निर्यात करे। सीएआई के मुताबिक, पिछले भारत ने 63 लाख गांठ रूई का निर्यात किया था।

उन्होंने बताया कि देसी रूई सस्ता होने से आयात में कमी आएगी क्योंकि मिलों को रूई का अयात महंगा पड़ेगा। इससे घरेलू भाव को सहारा मिलेगा। गंतरा ने बताया कि 20 लाख गांठ आयात की संभावना पहले जताई जा रही थी लेकिन अब इतना आयात मुश्किल लगता है। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा 17 लाख गांठ का आयात हो सकता है। पिछले साल भारत ने 27 लाख गांठ रूई का आयात किया था।

घरेलू मुद्रा रुपया इस समय अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन महीने के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है। गुरुवार को रुपया पिछले सत्र की क्लोजिंग 65.18 के मुकाबले थोड़ी कमजोरी के साथ 65.20 पर खुला जबकि इससे पहले का निचला स्तर 16 नवंबर को 65.31 रहा था।

उन्होंने बताया कि पश्चिमी अफ्रीकी देशों से अभी भारत में आयात के लिए रूई 93 सेंट प्रति पाउंड (एफओबी) पर उपलब्ध है, जबकि भारत में कॉटन इस समय करीब 83 सेंट प्रति पाउंड है। इस तरह 10 सेंट प्रति पाउंड सस्ता होने से भारतीय रूई के प्रति विदेशी बाजार में रुझान देखा जा रहा है।

अमेरिकी रूई का निर्यात भाव इस समय करीब 95-97 सेंट प्रति पाउंड है। जबकि आस्ट्रेलियाई रूई का भाव 98 सेंट प्रति पाउंड है। ये सभी भाव जुलाई में शिपमेंट के लिए हैं।

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