कोच्चि, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। केरल सरकार को तगड़ा झटका देते हुए उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सरकार को राज्य में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के लिए 38 हजार एकड़ जमीन के अधिग्रहण का आदेश दिया गया था।
खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया। पीठ ने पहले सरकार को आरएपीजी इंटरप्राइजेज की शाखा, विविध कृषि कंपनी हैरिसन मलयालम लिमिटेड (एचएमएल) की वृक्षारोपण जमीन के अधिग्रहण का आदेश दिया था।
राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पीठ ने रॉबिनहुड की तरह काम नहीं करने का आदेश दिया क्योंकि राज्य में पहले से ही बड़ी कंपनियां मौजूद हैं।
अदालत ने विशेष अधिकारी एम.जी. राजमानिकम की रिपोर्ट पर भी निशाना साधा। इसी रिपोर्ट को पिछले फैसले के लिए आधार बनाया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया था कि विदेशी कंपनियों ने नियमों का उल्लंघन कर जमीन हासिल की है और सभी संधियां व समझौते भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत रद्द और निरस्त हो जाते हैं।
इसलिए आजादी से पहले के सभी समझौते रद्द किए गए और इस तरह की जमीन का मालिकाना हक सरकार के पास रहना चाहिए।
एचएमएल उपाध्यक्ष वी. वेणुगोपाल ने बुधवार को एक बयान में कहा, “देश में एक सदी से ज्यादा समय से व्यापार करने के कारण जमीनों पर हमारा कानूनी अधिकार है। हमने बिना किसी उल्लंघन के वैधानिक नियमों का हमेशा पालन किया है।”
उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय के इस आदेश के साथ हमारी कंपनी के खिलाफ सभी संदेह समाप्त हो गए और यह हमें हमारा सामान्य व्यापार व यहां काम करने वाले हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों के विकास व उनकी वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने की इजाजत देता है।”
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