गूगल की ‘चैट’ सेवा साइबर अपराधियों को अनमोल उपहार : एमनेस्टी

सैन फ्रांसिस्को, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि गूगल की नई मैसेंजिंग सेवा ‘चैट’ को बिना एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन के लांच करने का फैसला एंड्रायड यूजर्स की गोपनीयता की पूरी तरह से अवमानना है और यह साइबर अपराधियों और सरकारी जासूसों के लिए बड़ा सौगात साबित होगा।

खबरों के मुताबिक, नई चैट सेवा पर संचार को इंटरनेट के जरिए नहीं, बल्कि मोबाइल फोन कैरियर के जरिए भेजा जाएगा, जिस तरह से एसएमएस टेक्स्ट मैसेज को भेजा जाता है।

इस हफ्ते द वर्ज को दिए एक बयान में गूगल के एक प्रवक्ता ने यह पुष्टि की कि नई सेवा में एंड-टू-एंड एंक्रिप्सन का प्रयोग नहीं किया गया है तथा गूगल अपने वर्तमान मैसेंजिंग एप ‘एल्लो’ में निवेश रोक रही है, जो एंड-टू-एंड सब्सक्रिप्शन से लैस है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के प्रौद्योगिकी और मानवाधिकार शोधार्थी जो वेस्टबाई ने शुक्रवार को कहा, “इस चौंकाने वाले कदम से गूगल ने न सिर्फ अपने प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ दिया है, क्योंकि एप्पल का आईमैसेज और फेसबुक का वाट्स एप दोनों बाई डिफाल्ट एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन का प्रयोग करती है, बल्कि यह कंपनी के पिछले ऑनलाइन मैसेजिंग प्रयासों से भी एक कदम पीछे हटना है।”

एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना है कि प्रौद्योगिकी कंपनियों के एंड-टू-एंड एंक्रिप्शन न्यूनतम जरूरत होनी चाहिए, ताकि मैसेंजर पर निजी जानकारियां गोपनीय बनी रह सके।

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