नौसेना कमांडरों का सम्मेलन संपन्न

नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। नौसेना कमांडरों का प्रथम द्विवार्षिक सम्मेलन शुक्रवार को यहां संपन्न हो गया। चार दिवसीय इस सम्मेलन में व्यापक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने किया।

रक्षामंत्री ने सम्मेलन में नौसेना कमांडरों को आश्वासन दिया कि पोत से उड़ान भरने वाले हेलिकॉप्टरों, फ्लीट सपोर्ट, पोत तथा पनडुब्बियों में क्षमता अंतर को पाटने के काम को गति दी जाएगी। उन्होंने भारतीय नौसेना के दीर्घकालिक अधिग्रहण योजना को अपना समर्थन दिया। यह योजना भारत-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक दृष्टि के साथ तैयार की गई है।

रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार, सम्मेलन में नौसेना के लिए दूसरे स्वदेशी मालवाहक विमान की स्वीकृति की आवश्यकता पर चर्चा की गई। जहाज निर्माण की जारी परियोजनाओं से भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बल मिलेगा। जहाज निर्माण परियोजनाओं में माइन काउंटर मेजर जहाज (एमसीएमवी), लैंडिंग प्लेटफार्म डॉक (एलपीडी), एनटी सबमरीन शैलो वाटर क्राफ्ट, डाइविंग सपोर्ट जहाज और सर्वेक्षण जहाज शामिल हैं।

बयान के अनुसार, सम्मेलन में नौसेना की मिशन आधारित तैनातियों की समीक्षा भी की गई। इस समीक्षा का उद्देश्य जहाजों की तैनाती तथा आईओआर के अंदर महत्वपूर्ण क्षेत्रो में तैनाती का अधिक से अधिक लाभ उठाना था। अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ सूचना साझा करने के अतिरिक्त इन तैनातियों के साथ रक्षा, कूटनीति प्रयासों जैसे द्विपक्षीय युद्धाभ्यास और एक दूसरे के बंदरगाहों पर आने जाने जैसे कदमों को आपस में जोड़ने की योजना है।

सम्मेलन में कमांडरों ने जहाजों के लिए रखरखाव से लेकर संचालन संबंधी नौसेना के नए परिवर्तन चक्र की भी समीक्षा की। नए परिवर्तन चक्र के परिणामस्वरूप युद्ध क्षमता तथा पोतों के संचालन दल की क्षमता में सुधार हुआ है। नए परिवर्तन चक्र से लॉजिस्टिक कल-पुर्जो का प्रबंधन तथा भविष्यवाणी तथा मरम्मत नियोजन और व्यय प्रबंधन में सुधार हुआ है।

नौसेना व कमांडरों के सम्मेलन में नई डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया गया। यह ज्ञान प्रबंधन और महत्वपूर्ण डाटा और सूचना अभिलेखों की वापसी के लिए संपूर्ण नौसेना के लिए उपलब्ध होगी।

नौसेना कमांडरों का अगला सम्मेलन इस वर्ष अक्टूबर या नवंबर में होगा।

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