नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख एरिक सोल्हीम का मानना है कि जब ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ की बात आती है जो इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय है, इसके लिए भारत खुद ही अपनी मदद कर सकता है।
नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रमुख एरिक सोल्हीम का मानना है कि जब ‘बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन’ की बात आती है जो इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय है, इसके लिए भारत खुद ही अपनी मदद कर सकता है।
भारत इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के नेतृत्व वाले वैश्विक कार्यक्रम ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ की मेजबानी कर रहा है और 2018 का विषय बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन (प्लास्टिक प्रदूषण को हराओ) है।
एरिक का कहना है कि ऐसे समय में जब अमेरिका ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते को छोड़ने के रास्ते पर है, तो यह भारत और चीन जो विश्व के शीर्ष प्रदूषकों में से एक हैं, के लिए सही समय है कि वे जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के खिलाफ युद्ध में दुनिया का नेतृत्व करें।
एरिक ने आईएएनएस को एक साक्षात्कार में बताया, “सबसे पहले, केवल भारत ही भारत को बदल सकता है। भारतीय राजनीतिक नेताओं और उसके लोग भारत बदल सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “लेकिन हम मदद कर सकते हैं।” एरिक का कहना है कि अपने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर काम करने के लिए एक बेताब निराशाजनक स्थिति के बावजूद दुनिया अभी भी भारत से सीख सकती है और भारत चीन से सीख सकता है।
भारत हर साल 6.2 करोड़ टन ठोस अपशिष्ट का उत्पादन करता है, जिसमें से केवल 4.3 करोड़ टन एकत्र किया जाता है। केवल 1.2 करोड़ टन का ट्रीटमेंट किया जाता है और बाकी को ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 2050 तक इस आंकड़े की 43.6 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस समस्या के निपटने के लिए बड़े प्रयासों की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “भारत में अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ा मुद्दा है और हर कोई इसे कहीं भी देख सकता है। हम ट्रेन से दिल्ली की ट्रेन से आगरा गए और हमने देखा, सभी पटरियों पर यहां-वहां प्लास्टिक फैली नजर आई। यह एक समस्या है।”
जैसा कि राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला ने अपनी रिपोर्ट में कहा, केवल प्लास्टिक कचरे की बात करते हुए लगभग 9, 00,000 टन प्लास्टिक- शीतल पेय की बोतलें, फर्नीचर, कालीन, पैनलिंग इत्यादि बनाने के लिए, 2015-16 में भारत में उत्पादित किया गया था, किया गया था।
एरिक हालांकि भारत को लेकर आशावादी हैं और देश के राजनीतिक नेताओं द्वारा की गई पहलों के द्वारा ऐसा संभव होने की उम्मीद जताते हैं। व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक, 15 अरब डॉलर की क्षमता वाले भारतीय अपशिष्ट प्रबंधन उद्योग के पास विकास की संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा, “स्थिति से निपटने के लिए आपको यह देखने की जरूरत है कि अतीत में इन समस्याओं का समाधान कैसे किया गया था। उदाहरण के लिए, हमने 1980 के दशक की सबसे बड़ी वैश्विक पर्यावरण समस्या ‘ओजोन परत में छेद’ का समाधान किया। उस समय भी राजनीतिक नेताओं और व्यवसायों ने हमसे समाधान के साधन खरीदे थे।”
अपनी नदियों की सफाई के लिए चीन की सराहना करते हुए संरा पर्यावरण प्रमुख ने कहा कि भारत चीन से सीख सकता है। उन्होंने कहा, “अगर चीन ऐसा कर सकता है तो भारत गंगा और अन्य नदियों में भी ऐसा कर सकता है।”
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को इंगित करते हुए जो कोच्चि हवाईअड्डे के रूप में बड़ा उदाहरण है और दुनिया का पहला सौर संचालित हवाईअड्डा है। इसके साथ तमिलनाडु में दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र का उदाहरण देते हुए एरिक ने कहा कि वह मानते हैं कि दुनिया भारत से बहुत कुछ सीख सकती है।
उन्होंने कहा, “हम दुनिया को भारत की सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रणाली प्रदान कर सकते हैं और भारत को दुनिया की दे सकते हैं।”
भारत और चीन की प्रदूषणकारी छवि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने इसके समाधान पर काम करने के लिए दोनों देशों की सराहना की।
उन्होंने कहा, “साफ शब्दों में कहूं तो भारत और चीन अपने पर्यावरण के मुद्दों को हल करने में आगे हैं, जाहिर है कि उनके पास चुनौतियां भी हैं।”
भारत और चीन के मुद्दों के बीच समान मुद्दों यातायात और वाहन प्रदूषण को रेखांकित करते हुए एरिक ने कि चीन ने पिछले 10 वर्षों में 35 शहरों में मेट्रो रेल का निर्माण किया और यह बिजली के वाहनों के सबसे बड़ा बाजार के रूप में उभरा है और इस राह का अनुसरण करते हुए भारत भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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