वाशिंगटन, 28 जून (आईएएनएस)। दिवगंत नेल्सन मंडेला के पोते नदाबा मंडेला ने कहा कि अगर उनके दादा अभी जिंदा होते तो वह आव्रजकों के लिए अपनी आवाज जरूर मुखर करते।
दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति की विरासत के बारे में कांग्रेस की लाइब्रेरी में अपने विचार व्यक्त करते हुए नदाबा मंडेला ने बुधवार को कहा, “मुझे लगता है कि वह हमारे मानवीय पक्ष के लिए वास्तव में अपील करते और कहते कि क्या आप भूल गए हैं कि यह देश विदेशियों द्वारा ही निर्मित किया गया है?”
उन्होंने कहा, “और मुझे लगता है कि वह दिन के अंत में वाकई में यह कहते हुए अपील करते कि कोई भी अलग-थलग नहीं रहता। हमें यह समझने की जरूरत है कि सभी एक आजाद विश्व में रह रहे हैं और हमें यह समझने, एहसास करने और मानने की जरूरत है कि हम सभी के पास मानव जाति की एक समान तकदीर है।”
नदाबा मंडेला अफ्रीका राइजिंग फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष हैं और हाल ही उन्होंने एक नई किताब ‘गोइंग टू द माउंटेन : लाइफ लेसन फ्रॉम माई ग्रांडफादर’ लिखी है।
कांग्रेसी लाइब्रेरियन कार्ला हेडन के साथ एक सम्मेलन में चर्चा के दौरान मंडेला ने विश्व के देशों में आव्रजकों के साथ सख्त रवैया अपनाने के खिलाफ बात की, जिसमें उनका अपना देश दक्षिण अफ्रीका भी शामिल है।
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